2024 का चुनाव घोषित हो गया है। इस चुनाव के लिये भाजपा और कांग्रेस ने अपने-अपने चुनावी घोषणा पत्र भी सांकेतिक रूप से जारी कर दिये हैं। क्या भाजपा के घोषणा पत्र को ही एन.डी.ए. यथारूप स्वीकार कर लेता है या नहीं यह आने वाले दिनों में स्पष्ट हो जायेगा। यही स्थिति कांग्रेस की है क्या इंडिया के घटक दल कांग्रेस के एजैण्डे पर मोहर लगा देंगे। यह सवाल इसलिये प्रसांगिक है क्योंकि भाजपा और कांग्रेस जो भी वायदे लोगों से करेंगे इसका असर राज्यों की सरकारों पर पड़ेगा। इस समय केंद्र और राज्य सरकारों पर जितना कर्ज है उसे सामने रखते हुये इस चुनाव के चुनावी वायदों पर स्वतः ही कई प्रश्न चिन्ह लग जाते हैं। भाजपा एन.डी.ए. ने पिछले चुनाव में जितने रोजगार प्रतिवर्ष उपलब्ध करवाने का वायदा किया था वह कितना पूरा हुआ है? किसानों की आय दोगुना करने का जो वायदा किया था क्या उसके तहत सही में आय बढ़ पायी है? इस दौरान शिक्षा और स्वास्थ्य कितने महंगे हुये हैं? क्या सभी को सस्ता न्याय मिल पाया? क्या संसद और विधानसभायें अपराधियों से मुक्त हो पायी है? ऐसे दर्जनों सवाल हैं जो इस चुनाव में पूछे जाने चाहिए? लेकिन कौन यह सवाल पूछने कहा साहस दिखाएगा?









वित्तीय मुहाने पर अन्तरराष्ट्रीय मुद्राकोष की चेतावनी ने और डरा दिया है। आई एम एफ के मुताबिक भारत का कर्ज जी डी पी का 100% होने जा रहा है। आर्थिकी को समझने वाले जानते हैं कि देश की अर्थव्यवस्था के लिये यह सबसे बड़ा काला पक्ष है। आने वाले चुनाव में युवाओं की भागीदारी सबसे ज्यादा होगी। हर तीसरा वोटर युवा होगा। सरकार की अपनी रिपोर्ट के मुताबिक तीन युवाओं में से हर दूसरा बेरोजगार है। रिपोर्ट के अनुसार केन्द्र सरकार के विभागों में ही 90 लाख पद खाली हैं और सरकार इन्हें भरने की स्थिति में नहीं है। यही स्थिति सार्वजनिक उपक्रमों की है। कॉर्पोरेट घरानों में भी रोजगार कम होता जा रहा है कुल मिलाकर देश एक गंभीर दौर से गुजर रहा है। प्रधानमंत्री इन मुद्दों को चुनावी मुद्दा नहीं बनने देना चाहते। इसलिये वह धार्मिक ध्रुवीकरण करने का हर संभव प्रयास कर रहे हैं। विपक्षीय एकता को तोड़ने का हर संभव प्रयास कर रहे हैं और इसके लिये अगले कुछ दिनों में ई डी, सी बी आई और आयकर जैसी ऐजैन्सीयों की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। जिस तरह से आयकर विभाग ने कांग्रेस के खातों से 65 करोड़ से अधिक की रकम आयकर के नाम पर निकाल ली है उससे यह स्पष्ट संकेत उभरता है कि कांग्रेस की राज्य सरकारों को भी अस्थिर करने का पूरा प्रयास किया जायेगा। जहां जो सरकारें अपने ही कारणों से कमजोर हो रही हैं उन पर अस्थिरता का प्रयोग किये जाने की बड़ी संभावना है।






