Saturday, 21 March 2026
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नशे के कैंसर से देश को बचाने का दायित्व किस का ?

आज हमारे सामने सबसे बड़ी गम्भीर समस्या नशे की समस्या है । नशे का यह कैंसर जिस तीव्रता से समाज में फैल रहा है उसे देखकर, सुनकर आदमी सीहर उठता है और लगता है जिस गति से नशा समाज को विनाश की गर्त में ले जा रहा है उससे तो समाज का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जायेगा। प्रतिदिन नषे से होने वाली युवाओं की मौतों की खबरें और नशे की बड़ी बड़ी खेपें पकड़े जाने के समाचार डराते हैं। मानव समाज के अस्तित्व को खतरे में डालने वाला स्वयं मानव समाज ही है । आदमी पैसे के लालच में अन्धा होता जा रहा है । एक समय था जब तम्बाकू, सिगरेट, बीड़ी और अधिक से अधिक शराब को नशा माना जाता था ।

आज अफीम, चरस, गांजा, कोकीन, चिट्टा और न जाने कौन कौन से नये नामों के साथ नशा समाज में तवाही मचा रहा है। इस धंधे में जो अन्धाधुंध कमाई हो रही है उसके लालच में लोग इस दलदल में फंसते हैं और जो फंस गये वे फिर निकल नहीं पाते । अधिक से अधिक धन कमाने के लालच में लोग फंसते हैं और वैसे ही बेईमानी का धन कमाने में पुलिस प्रशासन और अन्य एजैंसियां, जिन को इस पर नियन्त्रण करना है, वो भी रिश्वत के चक्कर में आंखें मूंद लेते हैं ।
इसका भयंकर परिणाम यह हो रहा है कि छोटे बच्चे, विद्यार्थी और युवा नशेड़ी बन जाते हैं । परिवार नियोजन के कारण बहुत सारे परिवारों में एक ही बच्चा, लड़का या लड़की होती है और वह मासूम जब नषे की लत का शिकार हो जाते हैं तो मॉं-बाप की जिन्दगी वैसे ही नरक बन जाती है । यदि युवा पीढ़ी नशेड़ होगी तो न सेना के लिये वीर सैनिक मिलेंगे न पुलिस प्रशासन में स्वस्थ जागरूक कर्मचारी, अधिकारी मिल पायेंगे न ही कृषि का क्षेत्र, न उद्योग का क्षेत्र और न ही सेवाओं का क्षेत्र बचेगा। नशे का यह जहर सारे समाज को खोखला करके समाप्त कर देगा ।
ऐसे में प्रश्न उठता है कि करें क्या ? इस संकट को दूर करने के लिये कोई बाहर से आकर समाधान नहीं निकालेगा हमें स्वयं प्रत्येक नागरिक को अपना अपने परिवार के प्रति, समाज के प्रति और राष्ट्र के प्रति दायित्व निभाना है । कुछ समय से मैं देख रहा हॅूं कि परिवार की परिभाषा पति, पत्नि और बच्चों तक ही सीमित हो गई है । समाज के अन्य लोगों का सुख दुख हमारा अपना नहीं होता । इसी प्रकार से हमारा सुख दुख समाज के लोगों का नहीं होता । इसी कारण से मनुष्य कष्ट या समस्या के समय सामाजिक प्राणी होते हुये भी अपने आप को अकेला पाता है।
कुछ समय पहले तक किसी का भी बच्चा अगर सिगरेट, बीड़ी या शराब आदि का नशा करते किसी को मिलता था तो प्रत्येक व्यक्ति अपना सामाजिक दायित्व समझते हुये उसे रोकता था । उसके परिवारजनों को सूचना देता था तो एक प्रकार से कुरीतियों पर दुष्प्रभावों पर पारिवारिक नियन्त्रण के साथ साथ सामाजिक नियन्त्रण भी होता था । नशे की बात हो, महिलाओं से छेड़खानी की बात हो या कोई दुर्घटना हो जाए तो आंख बचाकर निकलने में ही भलाई समझी जाती है ।
इसलिये पहले तो सभी अपना पारिवारिक दायित्व निभायें केवल बच्चे पैदा करना ही अपना दायित्व न समझें बल्कि उन्हें अच्छे संस्कार देना, बच्चों को समय देना और समाज को सुसंस्कृत, सभ्य नागरिक देना भी सभी का दायित्व है। सामाजिक दायित्व को समझते हुये उसके खिलाफ खड़े होने का नैतिक साहस अपने अन्दर पैदा करें और सामाजिक दायित्व को निभायें, गल्त किसी के साथ भी हो रहा है तो उसके खिलाफ आवाज उठायें ।
परिवार और समाज के साथ सरकार पर भी बहुत बड़ा दायित्व आता है इन बुराईयों को कुचलने के लिये सरकार को सख्त कानून बनाने की आवष्यकता है । इसमें वर्तमान कानूनों में अगर किसी संषोधन की आवश्यकता हो तो केन्द्र और प्रदेश की सरकारें मिलकर सख्त कानून बनायें ।
पुलिस प्रशासन के लोग अकसर यह षिकायत करते हैं कि हम तो केस पकड़ते हैं लेकिन अदालत से लोग छूट जाते हैं क्योंकि पकड़ी गई नशे की खेप की मात्रा कम होती है । तो क्या अपराधी इतनी कम मात्रा में लाते हैं या पकड़ने वाले पकड़ी गई खेप की मात्रा कम दिखाते हैं । इसलिये सख्त कानून की आवश्यकता केवल धन के लालच में लगे समाज विरोधी ड्रग तस्करों के लिये नहीं अपितु इसे बनाने वालों, तस्करी करने वालों, नशा फैलाने वालों, प्रयोग करने वालों और पुलिस प्रशासन तथा राजनीतिक संरक्षण देने वालों समेत सब के लिये सख्त कानून की आवश्यकता है । इसके लिये सब को इन सभी समाज विरोधी गतिविधियों में संलिप्त सभी लोगों के विरूद्ध सख्त दृष्टिकोण अपनाना होगा और सामान्य कानूनों के तहत मिलने वाले संरक्षण से इन्हें बाहर रखना होगा ।
मुझे याद है 1995 में संसद की ’’पर्यटन और परिवहन’’ की स्थाई समिति के सदस्य के तौर पर सिंगापुर जाने का अवसर मिला । उन दिनों अमेरिका के दो नागरिक नशे की तस्करी के आरोप में सिंगापुर में पकड़े गये थे । अमेरिका के राष्ट्रपति ने उन्हें छुड़ाने के भरसक प्रयास किये लेकिन प्रधानमन्त्री श्री ली ने एक न सुनी और तीस लाख की आवादी वाले सिंगापुर ने दुनिया के सबसे ताकतवर देश के नशे के दो तस्करों को अपने देश के कानून के अनुसार फांसी पर लटका दिया ।
क्या 140 करोड़ की आबादी वाला नया भारत और यहां के विभिन्न दलों के शासक दलगत राजनीति से ऊपर उठकर नशे के इस कैंसर से देश को मुक्त करने की इच्छाशक्ति दिखायेंगे और विश्वशक्ति बनने वाला भारत ’’नशा मुक्त’’ भी होगा ? यही हमारी सबसे बड़ी परीक्षा है और पास कर ली तो सबसे बड़ी उपलब्धि भी होगी ।

आपदा के कारण बेघर हुए लोगों को शहरी क्षेत्र में दो बिस्वा और ग्रामीण क्षेत्रों में तीन बिस्वा भूमि प्रदान करने का निर्णय

शिमला/शैल। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में आयोजित प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में वन विभाग की वन मित्र योजना को मंजूरी प्रदान की गई। इस योजना के तहत 2061 वन बीटों में एक-एक वन मित्र लगाए जाएंगे ताकि जमीनी स्तर के संस्थानों को शामिल करके वन क्षेत्रों के संरक्षण और विकास के लिए स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जा सके।

मंत्रिमंडल ने वन विभाग में वन रक्षकों के 100 रिक्त पदों को अनुबंध आधार पर भरने को भी मंजूरी प्रदान की।
बैठक में जल शक्ति विभाग के जल रक्षकों, बहु उद्देशीय कार्यकर्ताओं, पैरा फिटर और पैरा पम्प ऑपरेटर के मानदेय को 500 रुपये मासिक बढ़ाकर क्रमशः 5000 रुपये, 4400 रुपये, 6000 रुपये और 6000 रुपये करने का निर्णय लिया गया।
मंत्रिमंडल ने ऊना जिला में श्रद्धालुओं की सुविधा के दृष्टिगत 76.50 करोड़ रुपये की लागत से पीपीपी मोड में बाबा माई दास भवन पार्किंग चिन्तपूर्णी से मंदिर तक यात्री रोपवे प्रणाली स्थापित करने को सैद्धांतिक तौर पर मंजूरी प्रदान की।
मंत्रिमंडल ने परिवहन विभाग में 15 ई-टैक्सियां किराए पर लेने को मंजूरी पदान की।
बैठक में राज्य के सभी जिलों में आपात स्थिति के दौरान वैकल्पिक संचार के लिए एमेच्योर और सामुदायिक रेडियो को बढ़ावा देने का निर्णय लिया गया। इससे सूचना स्रोतों, आपातकालीन प्रबन्धकों और आपदा या आपातकालीन स्थितियों से प्रभावित लोगों के बीच प्रभावी सूचना आदान-प्रदान सुनिश्चित होगा।
बैठक में सीसे (लैड) पर अतिरिक्त माल कर 25 पैसे प्रति किलोग्राम की दर से कम करने का निर्णय लिया गया।
मंत्रिमंडल ने प्रदेश में लोगों को बेहतर परिवहन सुविधा के लिए राज्य में निजी संचालकों के लिए 234 रूट और टैम्पो ट्रेवलर्ज के 100 अतिरिक्त रूट प्रदान करने का निर्णय लिया।
बैठक में परिवहन विभाग के यातायात निरीक्षकों, मोटर वाहन निरीक्षकों, वरिष्ठ मोटर वाहन निरीक्षकों तथा पुलिस विभाग के सहायक उप-निरीक्षकों व हैड कांस्टेबल को मोटर वाहन अधिनियम-1988 की विभिन्न धाराओं के तहत अपराधों को कम करने के लिए नामित प्राधिकारी घोषित करने की भी मंजूरी दी।
मंत्रिमंडल ने आपदा के कारण बेघर हुए लोगों और जिन लोगों के पास नया घर बनाने के लिए उपयुक्त भूमि उपलब्ध नहीं है उन्हें शहरी क्षेत्र में दो बिस्वा भूमि और ग्रामीण क्षेत्रों में तीन बिस्वा भूमि प्रदान करने का निर्णय लिया।
मंत्रिमंडल ने प्रदेश में आपदा प्रभावित परिवारों के लिए 30 सितम्बर, 2023 को घोषित विशेष राहत पैकेज को मंजूरी प्रदान की। इस विशेष पैकेज के तहत घर के पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने पर दिए जाने वाले 1.30 लाख रुपये के मुआवजे को साढ़े पांच गुणा बढ़ाकर सात लाख रुपये किया गया है। इसके अलावा कच्चे मकान के आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त होने पर दिए जाने वाले मुआवजे को 25 गुणा बढ़ाकर 4000 रुपये से एक लाख रुपये तथा पक्के घर के आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त होने पर दिए जाने वाले मुआवजे को साढ़े 15 गुणा बढ़ाकर एक लाख रुपये किया गया है।
दुकान तथा ढाबा के क्षतिग्रस्त होने पर दिए जाने वाले मुआवजे को 25000 रुपये से चार गुणा बढ़ाकर एक लाख रुपये किया गया है। प्रदेश सरकार गऊशाला को हुए नुकसान की भरपाई के लिए दी जाने वाली राशि को 3000 रुपये से बढ़ाकर 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करेगी। प्रदेश सरकार किराएदारोें के सामान के नुकसान के लिए दी जाने वाली 2500 रुपये की राशि को 20 गुणा बढ़ाकर 50 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान करेगी। दुधारू तथा भार उठाने वाले पशुओं की क्षति पर 55 हजार जबकि बकरी, सुअर, भेड़ तथा मेमने की मुआवजा राशि 6000 रुपये प्रति पशु की दर से प्रदान की जाएगी।
कृषि तथा बागवानी भूमि के नुकसान की भरपाई के लिए दी जाने वाली राशि मुआवजा राशि को 3615 रुपये प्रति बीघा से बढ़ाकर 10,000 रुपये प्रति बीघा कर दिया है। फसलों कोे हुए नुकसान की भरपाई के लिए दी जाने वाली राशि को 500 रुपये प्रति बीघा को आठ गुणा बढ़ाकर 4000 रुपये किया गया है। कृषि तथा बागवानी भूमि से सिल्ट हटाने के लिए दी जाने वाली आर्थिक सहायता को 1384.61 प्रति बीघा से बढ़ाकर 5000 रुपये किया गया है। यह विशेष पैकेज 24 जून, 2023 से 30 सितम्बर, 2023 तक प्रदान किया जाएगा।
मंत्रिमंडल ने शिमला विकास योजना को संशोधित करने का निर्णय लिया। सड़क से ऊपर स्थित ग्रीन बेल्ट क्षेत्र में नवबहार से रामचन्द्रा चौक से मछीवाली कोठी से क्राइस्ट चर्च से लक्कड़ बाजार से आईजीएमसी से संजौली चौक से नवबहार तक जहां पेड़ नहीं हैं वहीं निर्माण की अनुमति दी जाएगी। शिमला विकास योजना के तहत ग्रीन बेल्ट क्षेत्र में सिर्फ उन्हीं प्लाटों पर आवासीय निर्माण को अनुमति प्रदान की जाएगी जहां पेड़ नहीं हैं।
मंत्रिमंडल ने नाला और खड्ड से क्रमशः पांच और सात मीटर की दूरी पर निर्माण को अनुमति देने के लिए हिमाचल प्रदेश नगर एवं ग्राम योजना नियमों को संशोधित करने का निर्णय लिया।

कारगिल विजय के अवसर पर शहीदों को नमन :

अंग्रेजी में कहा है “Eternal Vigilance is the price of liberty” सतत सतर्कता ही स्वतन्त्रता का मूल्य है अर्थात स्वतन्त्रता की रक्षा के लिये सदैव चौकन्ना रहना पड़ता है । यही कारण है कि हमारी सेनायें, हमारी स्वतन्त्रता, हमारे जानमाल और हमारे राष्ट्र की एक एक इंच के लिये चौबीसों घण्टे सजग, सचेत और सतर्क रहती है ।
स्वतन्त्रता मिलने के तुरन्त बाद जब पाकिस्तान ने कबायलियों के भेष में काश्मीर में अपनी सेना की घुसपैठ करवाई थी तब भी भारत के वीर सैनिकों ने देश की रक्षा की । पाकिस्तानियों के दांत खट्टे करते हुये पूरे का पूरा काश्मीर अपने कब्जे में लेने के लिये हमारे वीर सैनिक आगे बढ़ रहे थे तभी तत्कालीन प्रधानमन्त्री पण्डित जवाहर लाल नेहरू जी ने युद्वविराम की घोषणा कर दी और काश्मीर की समस्या देश के लिये खड़ी कर दी ।
1962 में भी वीर सैनिकों ने बिना आधुनिक हथियारों के भी चीन की सेना का जवरदस्त मुकाबला किया पर राजनीतिक नेतृत्व ने फिर हथियार डाल दिये । 1965 में भी वीर सैनिकों ने जबरदस्त विजय प्राप्त की । युद्व क्षेत्र में वीर सैनिकों ने अपनी वीरता और कुर्बानी से जो कुछ जीता था उसे ताशकन्द समझौते के अन्तर्गत बातचीत के टेबल पर खो दिया, केवल जीता हुआ क्षेत्र ही नहीं खोया हमने अपने प्रधानमन्त्री श्री लाल बहादुर शास्त्री जी को भी खो दिया ।
1971 के युद्व के परिणामस्वरूप वीर सैनिकों ने अपनी वीरता और वलिदान से पाकिस्तान के दो टुकड़े कर दिये, बंगला देश एक नया राष्ट्र बन गया । हमारे सैनिकों ने इकानवे हजार से ज्यादा पाकिस्तानी सैनिकों को युद्वबन्दी बना लिया। राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाई होती तो पूरे का पूरा काश्मीर हमारा हो सकता था परन्तु जो सैनिकों ने जीता वो शिमला समझौते के अन्तर्गत प्रधानमन्त्री श्रीमति इन्दिरा गान्धी ने बातचीत के टेबल पर खो दिया ।
इस सारे इतिहास को देखते हुये हम कह सकते हैं कि श्री अटल बिहारी वाजपेई जी के रूप में पहली बार देश को एक सशक्त नेतृत्व मिला जिसने जब आवश्यकता थी तो आण्विक बम धमाके भी किये और वीर सैनिकों की भावना का सम्मान करते हुये अन्तर्राष्ट्रीय दवाब के वावजूद युद्वविराम की घोषणा तब तक नहीं की जब तक कारगिल का अपना सारा क्षेत्र पाकिस्तान के घुसपैठियों से खाली नहीं करवा लिया ।
इतिहास में पहली बार 2 जुलाई, 1999 को प्रधानमन्त्री, श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी स्वयं सैनिकों की पीठ थपथपाने के लिये युद्व के मोर्चे पर गये । देश में प्रधानमन्त्री की इस पहल को लेकर जवरदस्त उत्साह का संचार हुआ । इस संघर्ष में शहीद हुये सैनिकों के पार्थिव शरीरों को पहली बार हवाई जहाज या हैलिकॉप्टर के माध्यम से उनके परिवारजनों तक पहुंचाया गया, राजकीय सम्मान के साथ उनका अन्तिम संस्कार किया गया । केन्द्र और प्रदेष सरकारों ने शहीद के परिवारों की सहायता के लिये हर सम्भव सहायता प्रदान करने का प्रयास किया ।
उस समय हिमाचल प्रदेष में हमारी सरकार थी । श्री नरेन्द्र मोदी हिमाचल के प्रभारी थे । हमने भी आपस में विचार विमर्ष करके सैनिकों तक खाद्य सामग्री (पका पकाया भोजन) और दैनिक उपयोग के वस्त्र आदि लिये और हैलीकॉप्टर भर कर 4 जुलाई को श्रीनगर पहुंच गये । 5 जुलाई प्रातःकाल हम श्रीनगर से कारगिल के लिये उड़े । जब हम कारगिल उतर रहे थे तब भी पाकिस्तान की तरफ से गोलाबारी हो रही थी । सेना के बरिष्ठ अधिकारी ब्रिगेडियर नन्द्राजोग के नेतृत्व में हमें जानकारियां दे रहे थे। भूमिगत मोर्चे में उपस्थित सैनिकों को सामान बांटा और बाकि सामान उन सैनिकों के पास दे दिया ताकि मोर्चे पर लड़ाई लड़ रहे सैनिकों तक भी पहुंचाया जा सके ।
सांयकाल श्रीनगर वापिस पहुंचकर हम सैनिक अस्पताल गये, घायल सैनिकों का कुशलक्षेम पूछा और उन्हें सामान बांटा । एक जवान विस्तर पर लेटा हुआ था उसने सामान पकड़ा नहीं, हमने सामान साईड टेबल पर रख दिया यह सोचकर कि शायद घायल होने के कारण यह नाराज़ होगा । ज्यूं ही हम मुड़े तो एक डाक्टर दौड़े दौड़े आया और हमें बताया कि माईन ब्लास्ट में उस जवान के दोनों हाथ और दोनों पैर उड़ गये थे । हम वापिस मुड़े और उसके सिर पर हाथ रखकर पूछा, ‘‘बहुत दर्द होता होगा’’, उसने कहा ‘‘पहले था, कल शाम से नहीं हो रहा है’’ । हमने पूछा क्या कोई दर्द निवारक दवाई ली या टीका लगा ? उसने कहा ‘‘नहीं, कल शाम (4 जुलाई को) टाईगर हिल वापस ले लिया मेरा दर्द खत्म हो गया,’’ यह सुनकर हम सब भावुक हो गये, देष भक्ति के इस जजवे को सलाम ।
हिमाचल के 52 जबान शहीद हुये थे, मैं सभी के घर गया, हर शहीद परिवार की दिल को छू लेने वाली बातें सुनी। पालमपुर में कारगिल युद्व के प्रथम शहीद कै0 सौरभ कालिया की माता जी अपने पास बैठी शहीद परमवीर चक्र कै0 विक्रम बत्रा की माता श्रीमति बत्रा को ढांढस बंधा रही थीं । एक मां जिसने अपना बेटा खोया था वह दूसरी मां, जिसने अभी अभी अपना बेटा खोया था, उसे सांत्वना दे रही थी ।
बिलासपुर के बीर सैनिक संजय कुमार को परमवीर चक्र मिला था। उसी जिले में एक जवान मंगल सिंह भी शहीद हुआ था। शहीद मंगल सिंह की मां, श्रीमति कौशल्या देवी ने डेढ किलो मीटर तक शहीद बेटे मंगल सिंह की अर्थी को कंधा दिया। पालमपुर के लम्बापट गांव के हबलदार रोशन लाल का जवान बेटा राकेश कुमार शादी के 15 दिन के अन्दर ही शहीद हो गया था । रोशन लाल जी को पछतावा था कि 1965 के युद्व में जिस मोर्चे पर वह तैनात था उसी मोर्चे पर उसका बेटा 1999 में शहीद हो गया ।
हमीरपुर जिले के बमसन चुनाव क्षेत्र के शहीद राज कुमार के पिता हबलदार खजान सिंह भी पूर्व सैनिक थे । जब मैं उनके घर पहुंचा तो इससे पहले कि मैं कुछ कहता, उन्होंने कहा, ‘‘धूमल साहब, बेटे तो पैदा ही इसलिये किये जाते हैं कि पढ़ें, लिखें और जवान होकर फौज में भर्ती होकर देश की रक्षा करें और जरूरत हो तो अपना वलिदान दें, आप दिल्ली जा रहे हैं तो वाजपेयी जी को कहना कि सैनिकों की कमी हो तो 82 वर्ष का हबलदार खजान सिंह आज भी हथियार उठाकर देश की रक्षा करने के लिये तैयार है’’ । यह शब्द सुनकर वहां उपस्थित हर कोई उनकी भावना की प्रशन्सा करने लगा । बाद में जब मैं अटल जी को मिला और उन्हें यह सारी घटनायें सुनाईं तो वे भी बड़े भावुक हुये ।
जब तक भारत मां के ऐसे वीर सपूत देष के लिये हर वलिदान देने के लिये तैयार होंगे तब तक यह देश सुरक्षित है। मातृभूमि के लिये समर्पण की भावना हर नागरिक में हो, शहीदों का सम्मान पूरा राष्ट्र करे तो स्वतन्त्रता और सुरक्षा दोनों सुनिष्चित की जा सकती हैं। कारगिल विजय के शुभ अवसर पर स्वतन्त्रता आंदोलन से लेकर जितने भी युद्व हुये उनमें शहीद हुये सभी शहीदों को कोटि कोटि नमन ।

प्रेम कुमार धूमल
पूर्व मुख्यमन्त्री, हिमाचल प्रदेश

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