शिमला/शैल। पिछले दिनों जिस तरह के ट्वीट
कांग्रेस विधायको राजेंद्र राणा और सुधीर शर्मा के आये हैं उससे राजनीतिक हल्कों और प्रशासनिक गलियारों में जो चर्चाएं चल निकली हैं यदि उन्हें अधिमान दिया जाए तो निश्चित रूप से सुक्खू सरकार सियासी संकट में फंस चुकी है। क्योंकि आठ माह में सुक्खू अपने मंत्रिमंडल के तीन रिक्त स्थानों को नहीं भर पाये हैं। विधानसभा उपाध्यक्ष का भी एक पद खाली चला आ रहा है। इन खाली पदों को एक समय सुक्खू का मास्टर स्ट्रोक कुछ लोगों ने माना था । लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों की नजर में जब सुक्खू ने मंत्रिमंडल के विस्तार से पहले ही छः मुख्य संसदीय सचिवों की नियुक्ति कर ली तब यह स्पष्ट हो गया था कि मुख्यमंत्री और उनकी सरकार एक कूटनीति की शिकार हो गई है और कभी भी निष्पक्ष निर्णय नहीं ले पाएगी । क्योंकि मुख्य संसदीय सचिवों की नियुक्तियां संविधान के अनुरूप नहीं है। इन नियुक्तियों को एक दर्जन भाजपा विधायकों सहित तीन याचिकाओं के माध्यम से उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है। यह फैसला जब भी आएगा इनके खिलाफ ही आएगा। पहले भी उच्च न्यायालय ऐसी नियुक्तियों को रद्द कर चुका है। सर्वोच्च न्यायालय भी इन्हें असंवैधानिक करार दे चुका है।कानून की यह जानकारी होने के बावजूद भी ऐसी नियुक्तियां करना क्या दर्शाता है यह अंदाजा लगाया जा सकता है। लोकसभा चुनावों से पूर्व यहफैसला आना तय है।