Wednesday, 07 October 2026
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कांग्रेस की अंदरूनी कलह पर राणा का वार

शिमला/शैल। हिमाचल की राजनीति में विधानसभा चुनाव की आहट के साथ कांग्रेस के भीतर खींचतान का मुद्दा फिर गरमाने लगा है। भाजपा के वरिष्ठ प्रदेश प्रवक्ता एवं पूर्व विधायक राजेंद्र राणा ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू पर सीधा हमला बोलते हुए दावा किया है कि सरकार की सबसे बड़ी चुनौती अब विपक्ष नहीं, बल्कि उसकी अपनी कांग्रेस बनती जा रही है। राणा ने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि रोहड़ू और रामपुर प्रवास के दौरान लगाए गए कांग्रेस के पोस्टरों में पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को अपेक्षित स्थान क्यों नहीं दिया गया और पार्टी के भीतर इसको लेकर उठ रहे सवालों का जवाब कौन देगा?
राणा ने कहा कि जैसे-जैसे अगला विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहा है, कांग्रेस के अंदर की खींचतान भी सामने आने लगी है। उनके मुताबिक वीरभद्र सिंह लंबे समय तक हिमाचल कांग्रेस के सबसे बड़े राजनीतिक चेहरों में रहे और रोहड़ू-रामपुर क्षेत्र उनकी राजनीतिक विरासत से गहराई से जुड़ा रहा है। ऐसे में इन क्षेत्रों में पार्टी के कार्यक्रमों और प्रचार सामग्री में वीरभद्र सिंह की मौजूदगी को लेकर उठे सवालों को केवल पोस्टर का मामला मानकर खारिज नहीं किया जा सकता।
उन्होंने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा में गुटबाजी तलाशने से पहले उन्हें अपनी पार्टी की स्थिति देखनी चाहिए। राणा का आरोप है कि सरकार बनने के बाद से ही कांग्रेस के भीतर नेताओं, विधायकों और संगठन के बीच बेहतर समन्वय को लेकर सवाल उठते रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब सरकार के सामने केवल विपक्ष के आरोपों का जवाब देने की चुनौती नहीं है, बल्कि उसे अपनी पार्टी के भीतर उठ रही आवाजों का भी सामना करना पड़ रहा है।
राणा ने कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी रजनी पाटिल के संगठन में अनुशासन और समन्वय को लेकर दिए गए बयानों का हवाला देते हुए कहा कि इससे भी साफ होता है कि कांग्रेस के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की अपेक्षा मुख्यमंत्री के करीबी लोगों का प्रभाव ज्यादा दिखाई देता है। हालांकि ये भाजपा के आरोप हैं, लेकिन राणा ने मुख्यमंत्री से मांग की कि वह कांग्रेस के भीतर चल रही स्थिति पर खुलकर अपना पक्ष रखें।
सबसे ज्यादा निशाना मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर साधा गया। राणा ने कहा कि सरकार के गठन के बाद से ही मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर समय-समय पर चर्चाएं होती रही हैं, लेकिन लंबे समय से खाली पद अब तक नहीं भरा गया। उन्होंने कहा कि कभी कुल्लू के विधायक सुंदर सिंह ठाकुर का नाम मंत्री पद के लिए सामने आया तो बाद में पालमपुर के विधायक आशीष बुटेल का नाम भी चर्चा में जुड़ गया। इसके बावजूद विस्तार की तस्वीर साफ नहीं हुई।
राणा ने कहा कि एक तरफ मुख्यमंत्री मंत्रिमंडल विस्तार की संभावना जताते रहे हैं, जबकि दूसरी तरफ पार्टी की प्रदेश प्रभारी की ओर से यह बात सामने आई कि मुख्यमंत्री की ओर से विस्तार का प्रस्ताव नहीं आया। भाजपा नेता ने इसी विरोधाभास को मुद्दा बनाते हुए पूछा कि आखिर सरकार में सच क्या है? उनका कहना है कि यदि मंत्रिमंडल विस्तार करना है तो मुख्यमंत्री समय सीमा स्पष्ट करें और यदि नहीं करना है तो बार-बार इसकी चर्चा क्यों की जाती है।
राणा ने तंज कसते हुए कहा कि मंत्रिमंडल विस्तार अब सरकार के लिए ऐसा विषय बन गया है जिसकी घोषणा तो बार-बार होती है, लेकिन जमीन पर फैसला दिखाई नहीं देता। उन्होंने कहा कि मंत्री बनना किस विधायक को है, यह कांग्रेस का आंतरिक मामला है, लेकिन जब मुख्यमंत्री स्वयं सार्वजनिक रूप से इस मुद्दे पर बयान देते हैं तो जनता को स्थिति स्पष्ट करने का अधिकार है।
भाजपा नेता ने मुख्यमंत्री पर ‘मित्र मंडली’ के प्रभाव का भी आरोप लगाया। उनका कहना है कि सरकार के आसपास गैर-निर्वाचित लोगों का प्रभाव बढ़ा है और कई निर्वाचित विधायकों तथा मंत्रियों को अपेक्षित महत्व नहीं मिल रहा। राणा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के भीतर असंतोष का एक कारण यही राजनीतिक कार्यशैली भी है। उन्होंने कहा कि सरकार बनने के बाद ‘व्यवस्था परिवर्तन’ का नारा दिया गया था, लेकिन अब कांग्रेस के भीतर ही नई व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
राणा ने सरकार की वित्तीय स्थिति को भी चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश की। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश का कुल कर्ज करीब 1.15 लाख करोड़ रुपये के स्तर तक पहुंच गया है। उन्होंने सरकार से श्वेतपत्र जारी करने की मांग की, जिसमें मौजूदा सरकार के कार्यकाल में लिए गए कर्ज, उसके इस्तेमाल, ब्याज भुगतान और विकास कार्यों पर खर्च का पूरा ब्यौरा दिया जाए। राणा का कहना है कि कर्ज की वास्तविक स्थिति जनता के सामने आने के बाद ही यह पता चलेगा कि सरकार ने उधार का कितना पैसा विकास पर लगाया और कितना पुराने दायित्वों को पूरा करने में खर्च हुआ।
उन्होंने कर्मचारी वर्ग के वित्तीय लाभ, महिलाओं से किए गए चुनावी वादों, युवाओं के रोजगार और बागवानों की समस्याओं को भी सरकार के सामने बड़ी चुनौती बताया। राणा ने कहा कि इन वर्गों की अपेक्षाएं लगातार बढ़ रही हैं और सरकार को केवल राजनीतिक बयानबाजी के बजाय इन मुद्दों पर ठोस जवाब देना होगा।
राजेंद्र राणा ने मुख्यमंत्री से कांग्रेस के भीतर वरिष्ठ नेताओं, मंत्रियों, विधायकों और संगठन के बीच समन्वय की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि सरकार विपक्ष पर हमला करने के बजाय अपनी पार्टी के भीतर संवाद मजबूत करे और विकास कार्यों पर ध्यान दे तो इसका लाभ प्रदेश को मिलेगा।
भाजपा नेता के इन आरोपों ने साफ कर दिया है कि आने वाले समय में कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति भी हिमाचल के चुनावी विमर्श का बड़ा हिस्सा बनने वाली है। हालांकि राणा के आरोपों पर कांग्रेस और मुख्यमंत्री का पक्ष सामने आना बाकी है, लेकिन एक बात स्पष्ट है कि 2027 की लड़ाई से पहले भाजपा कांग्रेस के भीतर के मतभेदों को बड़ा राजनीतिक हथियार बनाने की तैयारी में है।

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