नए सीएम कार्यालय पर सियासत तेज
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Created on Saturday, 03 October 2026 10:54
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Written by Shail Samachar
शिमला/शैल। राजधानी शिमला के एलर्सली फेस-प्प् में नए मुख्यमंत्राी कार्यालय के उद्घाटन के बाद इसको लेकर राजनीति तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने सोमवार को नये कार्यालय का उद्घाटन किया। सरकार का कहना है कि यह कार्यालय केवल मौजूदा मुख्यमंत्री के लिए नहीं, बल्कि आगे आने वाले सभी मुख्यमंत्रियों के लिए होगा। वहीं विपक्ष ने प्रदेश की आर्थिक स्थिति को देखते हुए इस पर खर्च को लेकर सवाल उठाए हैं।
मुख्यमंत्री का कहना है कि पुराने मुख्यमंत्री कार्यालय में जगह कम थी। प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से लोग अपनी समस्याएं लेकर मुख्यमंत्री से मिलने आते हैं। उनके बैठने और इन्तजार करने के लिए पर्याप्त जगह नहीं थी। नए कार्यालय में लोगों के लिए वेटिंग एरिया, बैठक के लिए हॉल, अधिकारियों के कमरे और पार्किंग जैसी सुविधाएं रखी गई हैं। सरकार के अनुसार इससे मुख्यमंत्री और आम लोगों के बीच मुलाकात आसान होगी और सरकारी कामकाज और भी बेहतर तरीके से चल सकेगा।
नए कार्यालय में मुख्यमंत्री के साथ वरिष्ठ अधिकारियों के लिए भी कमरे बनाये गए हैं। नए भवन में करीब 40 वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था होने की भी जानकारी दी गई है। इस कार्यालय की अनुमानित लागत करीब 19.72 करोड़ रुपये बताई गई थी।
नए कार्यालय को लेकर विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा है। भाजपा नेताओं का कहना है कि हिमाचल पहले से आर्थिक दबाव में है और सरकार को खर्च की प्राथमिकता तय करनी चाहिए। विपक्ष का सवाल है कि जब प्रदेश पर कर्ज और दूसरे वित्तीय दायित्व बढ़ रहे हैं तो मुख्यमंत्री कार्यालय जैसे भवन पर इतना खर्च करना कितना जरूरी था। कुछ पेंशनरों ने भी इसी तरह के सवाल उठाते हुए कहा है कि एक तरफ सरकार आर्थिक मुश्किलों की बात करती है और दूसरी तरफ नये भवन का उद्घाटन किया जा रहा है।
कांग्रेस विधायक सुधीर शर्मा ने इस मामले में इससे भी ज्यादा खर्च होने का आरोप लगाया है। उन्होंने करीब 50 करोड़ रुपये खर्च होने का दावा करते हुए भवन और फर्नीचर पर हुए खर्च पर सवाल उठाए हैं। हालांकि सरकार की ओर से बताई गई लागत करीब 20 करोड़ रुपये है। इसलिए 50 करोड़ रुपये के दावे की पुष्टि के लिए पूरा सरकारी खर्च और भुगतान का रिकॉर्ड सामने आना जरूरी है।
नए मुख्यमंत्री कार्यालय को लेकर यह भी चर्चा है कि ऐसी सुविधा की जरूरत पहले की सरकारों में भी महसूस की गई थी। वर्ष 2021 में एलर्सली परिसर में मुख्यमंत्री कार्यालय के लिए वेटिंग हॉल, लिफ्रट और रैंप तथा सचिवालय में पार्किंग और कार्यालय की सुविधा बढ़ाने से जुड़े प्रस्ताव सामने आये थे। इस मामले में उस समय एनजीटी और बाद में अदालत की प्रक्रिया भी हुई थी।
पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के कार्यकाल में भी नये मुख्यमंत्री कार्यालय को लेकर विचार हुआ था। उनके अनुसार हेरिटेज से जुड़े कारणों से उस समय यह काम आगे नहीं बढ़ पाया। मौजूदा भवन का निर्माण वर्तमान सरकार के समय आगे बढ़ा। वर्ष 2025 में इसकी आधारशिला रखी गई थी। इसके बाद निर्माण का काम पूरा हुआ और अब मुख्यमंत्री कार्यालय यहां से काम करेगा।
इस मामले में एक कानूनी पहलू भी है। एलर्सली परिसर में हुए निर्माण को लेकर हाईकोर्ट में याचिका लंबित है। इसमें निर्माण और हेरिटेज नियमों से जुड़े सवाल उठाए गए हैं। अदालत में इस मामले की सुनवाई चल रही है अंतिम स्थिति फैसले के बाद साफ होगी।
नए कार्यालय को लेकर सरकार और विपक्ष के अपने-अपने तर्क हैं। अब इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि भवन की अंतिम लागत कितनी रही, इसमें कौन-कौन से काम शामिल हैं और इससे लोगों को वास्तव में कितनी सुविधा मिलती है। आने वाले समय में इसकी उपयोगिता और खर्च दोनों का आकलन इसके वास्तविक इस्तेमाल से होगा।
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