शिमला/शैल। ई गर्वनैस और ई समाधान की वकालत केन्द्र से लेकर राज्यों तक की जा रही है बल्कि अब ई माध्यम से ही सर्वोच्च न्यायालय तक में याचिका डालने का मार्ग प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने इसका बटन दबाकर प्रशस्त करने का दावा किया है। राज्य सचिवालय में भी ई-समाधान का सैल कार्यरत है परन्तु यह सब जमीनी हकीकत पर कितना सही है इसका खुलासा जेएमआईसी मनाली की कोर्ट में आये एक मामलें से हो जाता है। इस मामलें के मुताबिक मनाली जनपद की तीन महिलाओं पुष्प लत्ता आयु 35 वर्ष, पुर्णिमा 30 वर्ष और राधा देवी 63 वर्ष ने 19-1-2016 को एसएचओ मनाली को क्षेत्रा के कुछ राजस्व अधिकारियों के खिलाफ एक गंभीर शिकायत दी। लेकिन एसएचओ ने पूरा दिन इनको बैठाये रखने के वाबजूद मामला दर्ज नहीं किया। कई दिन तक चक्कर काटने के बाद भी जब मामला दर्ज नही हुआ तब इन्होने कोर्टे का सहारा लिया और सीआरपीसी की धारा 156(3) के तहत अदालत से गुहार लगायी। अदालत ने 12-9-2016 को संबधित पुलिस थाना को मामला दर्ज करने के निर्देश दिये। इन निर्देशों पर भी आठ दिन बाद 20-3-2016 को मामला दर्ज हुआ। लेकिन मामला दर्ज होने के बावजूद दोषी राजस्व अधिकारियों के खिलाफ अभी तक कोई कारवाई नही हो पायी है। बल्कि एसएचओ मनाली ने अदालत को भेजे अपने उत्तर में याचिकाकर्ताओं पर ही पुलिस को सहयोग न देने का आरोप लगाया है।
जबकि पीड़ित महिलाओं ने सारे मामले की शिकायत पूरे दस्तावेजी प्रमाणों के साथ डीएसपी मनाली, एसडीएम मनाली को दी जंहा से 19-1-2016 को ही यह सारे दस्तावेज एसएचओ मनाली को भेज दिये गये थे। इन दस्तावेजों के थाना मनाली में पहुंचने का प्रमाण भी पीड़ित महिलाओं के पास है। लेकिन इनकी शिकायत पर कोई कारवाई करने के लिये तैयार नही है। यही नहीं इन्होने अपनी शिकायत देश के प्रधानमन्त्री के कार्यालय को, प्रदेश के मुख्यमन्त्री वीरभद्र सिंह, सुप्रीम कोर्ट और प्रदेश उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार को भी डाक और ई माध्यम से भेजी है लेकिन कहीं से भी इन्हे कोई जबाब या कारवाई नहीं मिली है।
अब 20-3-2017 को एक बार फिर से जेएमआइसी मनाली की अदालत का दरवाजा खटखटाकर इस शिकायत की जांच डीएसपी स्तर के अधिकारी से करवाये जाने की गुहार लगायी है। अदालत को दी याचिका में इन्होने प्रधानमन्त्री के सचिव, मुख्यमन्त्री वीरभद्र सिंह, रजिस्ट्रार सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट, जेएमआईसी कार्यालय और एसएचओ मनाली के कार्यालय को याचिका में बतौर गवाह नामज़द किया है। अदालत इस पर क्या आदेश करती है और पुलिस तन्त्र की क्या प्रतिक्रिया होगी इस पर सबकी निगाहें लगी है।
शिमला/शैल। मुख्यमन्त्री वीरभद्र सिंह के गृह जिला शिमला से एक समय मानवाधिकार और कांग्रेस पार्टी के लीगल सैल के चेयरमैन रहे वरिष्ठ वकील आईडीबाली ने आने वाले विधानसभा चुनावों में ठियोग से चुनाव लड़ने की घोषणा की है। बाली ने पार्टी का वरिष्ठ कार्यकर्ता होने का दावा करने के साथ ही आज पार्टी में परिवारवाद और एकाधिकार होने का आरोप भी लगाया है। मीडिया के सामने अपना प्रोफाईल और एजैण्डा रखते हुए बाली ने कहा कि पार्टी के अन्दर कुछ नेताओं ने एक तरह से अपना कब्जा कर रखा है। उन्होने आरोप लगाया कि आज राज्यसभा तो शरणालय बन कर रह गया है। जिन नेताओं का प्रदेश में कोई आधार नही है वह राज्यसभा पर कब्जा करके बैठै हुए हैं। इस संद्धर्भ में उनका निशाना सीधे आनन्द शर्मा और ठियोग में विद्या स्टोक्स पर था। बाली ने कहा कि उनकी वरिष्ठता को देखते हुए पार्टी को उन्हे ठियोग से उम्मीदवार बनाना चाहिए। पार्टी की वर्तमान स्थिति को कांग्रेस हाईकमान के सामने भी पूरी बेवाकी से रखने का भी उन्होने ऐलान किया। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि वह टिक्ट के लिये कोई आवेदन नही करेंगे। कांग्रेस के अतिरिक्त किसी और दल से भी टिकट मांगने से उन्होने इन्कार किया।
बाली शिमला के एक वरिष्ठ कांग्रेस कार्यकर्ता हैं और वीरभद्र के विश्वस्त भी माने जाते हैं क्योंकि उन्ही के कार्यकाल में वह मानवाधिकार आयोग के सदस्य भी रह चुके हैं। इस समय प्रदेश कांग्रेस पार्टी में पार्टी अध्यक्ष सुक्खु और मुख्यमन्त्री वीरभद्र सिंह में राजनीतिक रिश्ते कोई बहुत अच्छे नहीं हैं। बल्कि पिछले दिनों हुई सीएलपी की बैठक में भी सुक्खु निशाने पर रहे हैं। सुक्खु को विद्या स्टोक्स और आनन्द शर्मा का सहयोग भी प्राप्त है यह भी सब जानते है। संगठन की कार्य प्रणाली से वीरभद्र के कुछ समर्थक रूष्ठ हैं और उन्होने अपना अलग से एक एनजीओ भी गठित कर रखा है। बल्कि इस एनजीओ के अध्यक्ष ने कुल्लु में सुक्खु के खिलाफ मानहानि का दावा भी कर रखा है। ऐसे में आज आई डी बाली जैसे वरिष्ठ कार्यकर्ता द्वारा विद्यास्टोक्स और आनन्द शर्मा के खिलाफ सीधे नाम लेकर हमला करने को हल्के से नही लिया जा सकता। पार्टी ने अभी तक अगले चुनावों को लेकर किसी के भी नाम की कोई घोषणा नही की है ऐसे बाली द्वारा चुनाव लड़ने की सीधी घोषणा पर पार्टी की प्रतिक्रिया और कारवाई क्या होती है इसका पता आने वाले दिनों में लगेगा। वीरभद्र के खिलाफ चल रहे मामलों पर बाली ने कोई पूरी जानकारी न होने के कारण प्रतिक्रिया देने से इन्कार कर दिया।
शिमला/शैल। आय से अधिक संपति मामलें में अन्ततः ट्रायल कोर्ट ने सीबीआई द्वारा दायर चालान पर सज्ञांन लेते वीरभद्र एवम् अन्य को नोटिस जारी कर दिये है। सभी नामज़द अभियुक्तों को 22 मई को अदालत में हाजिर होना होगा। हाजिर होने पर नियमित जमानत लेनी होगी। इसके बाद इन्हे दायर हुए चालान की कापी मिलेगी। चालान की कापी मिलने के बाद उसके निरीक्षण का समय मिलेगा। इस निरीक्षण पर यदि चालान की कापी में कोई कमी पायी जाती है तो उसे कोर्ट के समाने रखा जायेगा और पूरा किया जायेगा। इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद आरोप तय होने की स्थिति आयेगी। आरोप तय होने के लिये पूरी बहस का समय मिलेगा।
आरोप तय होने के बाद ही नामज़द अभियुक्तों को एतराज उठाने का अवसर मिलता है। क्योंकि आरोप तय होने से पहले कथित अभियुक्त को कोई अधिकार नही है। माना जा रहा है कि जून अन्त तक आरोप तय हो जायेंगे।
The Joomla! content management system lets you create webpages of various types using extensions. There are 5 basic types of extensions: components, modules, templates, languages, and plugins. Your website includes the extensions you need to create a basic website in English, but thousands of additional extensions of all types are available. The Joomla! Extensions Directory is the largest directory of Joomla! extensions.
We search the whole countryside for the best fruit growers.
You can let each supplier have a page that he or she can edit. To see this in action you will need to create a users who is in the suppliers group.
Create one page in the growers category for that user and make that supplier the author of the page. That user will be able to edit his or her page.
This illustrates the use of the Edit Own permission.