Saturday, 20 June 2026
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तिलक राज प्रकरण का ईडी ने भी लिया संज्ञान जारी रही न्यायिक हिरासत

कुछ अधिकारियों और नेताओं तक आ सकती है आंच

शिमला/शैल। पांच लाख के रिश्वत मामलों में एक उद्योगपति के साथ रंगे हाथों सीबीआई द्वारा पकड़े गये हिमाचल उद्योग विभाग के बद्दी स्थित संयुक्त निदेशक तिलक राज शर्मा अभी तक न्यायिक हिरासत से बाहर नही आ पाये हैं। सीबीआई के चार दिन के रिमांड के बाद अदालत ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। यह चौदह दिन पूरे होने के बाद जब तिलक राज को पुनः अदालत में पेश किया गया तब सीबीआई ने उनकी हिरासत जारी रखने का आग्रह किया जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया क्योंकि तिलक राज ने स्वयं ही जमानत के लिये याचना नही की थी। तिलक राज ने जमानत के लिये क्यों आवदेन नही किया इस सवाल की पड़ताल में यह सामने आया है कि अब इस प्रकरण का सीबीआई के साथ ही ईडी ने भी संज्ञान ले लिया है। 

स्मरणीय है कि जब एक फार्मा उद्योग की सब्सिडी की फाईल प्रौसैस करने के लिये तिलक राज ने अशोक राणा के माध्यम से दस लाख की रिश्वत की मांग की थी और इस मांग की सूचना सीबीआई को दी गयी थी तब सीबीआई ने तिलक राज, अशोक राणा और शिकायतकर्ता चन्द्रशेखर के बीच इस संद्धर्भ में हो रही बातचीत को रिकार्ड किया था जब उस संवाद में यह सामने आया था कि रिश्वत का यह पैसा मुख्यमन्त्री के दिल्ली स्थित ओएसडी रघुवंशी को जाना है। फिर तिलक राज और अशोक राणा के चार दिन के रिमांड के दौरान सीबीआई को जो जानकारीयां मिली हैं उनमें एक दिल्ली स्थित सुरेश पठानियां का नाम भी सामने आया है। इसके अतिरिक्त दो नेताओं, दो बड़े अधिकारियों और इनके कुछ परिजनों तथा कुछ पत्राकारों के नाम भी सामने आने की चर्चा है जिन लोगों ने अकसर तिलक राज की सवेाओं का लाभ भी उठाया है और उसे संरक्षण भी दिया है। यह सारी जानकारियां मिलने के बाद सीबीआई ने इन सारे लोगों के बारे में आयकर, आईबी आदि के माध्यम से भी पड़ताल की है। इस पड़ताल के बाद ही दिल्ली में रघुवंशी और सुरेश पठानिया से अलग-अलग पूछताछ करने के साथ ही तिलक राज और अशोक राणा को आमने-सामने बैठा कर भी सवाल जवाब किये गये हंै। सूत्रों की माने तो बहुत लोगों की दिल्ली, चण्डीगढ़ और देहरादून तक संपत्तियां होने की जानकारी सामने आयी है।
बद्दी में कुछ फार्मा उद्योगों के लाईसैन्सों को लेकर तथा कुछ स्टोन क्रशरों पर ईडी लम्बे समय से नजर रखे आ रहा था। इसमें उद्योग विभाग के साथ-साथ, पाल्यूशन कन्ट्रोल बोर्ड, तथा स्वास्थ्य विभाग के ड्रग कन्ट्रोल बोर्ड, तथा स्वास्थ्य विभाग के ड्रग कन्ट्रोल से जुडे अधिकारी केन्द्रिय एैजैन्सियों के राडार पर चल रहे थे कुछ उद्योगों के दस्तावेजों को लेकर तो एक अधिवक्ता की सेवाएं भी ली गयी है। इस अधिवक्ता ने भी अपनीे रिपोर्ट में कुछ उद्योगों की प्रमाणिकता पर गंभीर सवाल उठाये हैं। यह रिपोर्ट भी कुछ उद्योगों द्वारा सब्सिडी लिये जाने के संद्धर्भ में आई है। इस रिपोर्ट के बाद ही ईडी ने करीब डेढ़ दर्जन उद्योगों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कर रखी है। माना जा रहा है कि तिलक राज और उसके संपर्काे पर ऐजैन्सीयों की लम्बे समय से नजर चली आ रही थी। अब तिलक राज की गिरफ्तारी और जमानत के लिये आवदेन न करने से यह माना जा रहा है कि यह पूरा प्रकरण काफी लम्बा चलेगा और इसमें आने वाले दिनों में कई लोगों पर गाज गिरेगी।
अब ईडी द्वारा इसका संज्ञान लेने के बाद तथा इस संद्धर्भ में रघुवंशी और सुरेश पठानिया से भी प्रारम्भिक पूछताछ होने से यह माना जा रहा है कि इस मामले में कई बड़े लोगों से निकट भविष्य में पूछताछ की जायेगी तथा कुछ और गिरफ्तारीयां  भी हो सकती है।

वीरभद्र से त्यागपत्र मांगना बना भाजपा नेतृत्व की मजबूरी

शिमला/शैल। भाजपा के हर छोटे बडे़ नेता को मुख्यमन्त्री वीरभद्र से त्यागपत्र मागंना क्या राजनीतिक मजबूरी बन गया है यह सवाल अब चर्चा में आने लगा है। क्योंकि वीरभद्र के खिलाफ केन्द्र की तीन ऐजैन्सीयों  आयकर सीबीआई और ईडी में मामले चल रहे हैं। इनमे सीबीआई के आय से अधिक संपत्ति मामले में जांच पूरी होकर चालान भीअदालत में पहुंच चुका है। इस मामले में वीरभद्र सहित सभी नामजद़ अभियुक्तों को अदालत से जमानत मिल चुकी है। इस मामले कोअन्तिम निर्णय तक पहुचने के लिये ट्रायल कोर्ट से सर्वोच्च न्यायालय तक का लम्बा सफर तय करना पडे़गा यह तय है। ऐसे में इस मामले का अभी कोई प्रतिकूल राजनीतिक प्रभाव पड़ना संभव नहीं है।
सीबीआई के बाद ईडी में मनीलाॅडरिंग का मामला चल रहा है। इस मामले में ईडी चल /अचल संपत्ति को लेकर दो अटैचमैन्ट आदेश जारी कर चुकी है। पहला आदेश जारी होने के बाद ईडी ने जुलाई 2016 में वीरभद्र के एलआईसी ऐजैन्ट आनन्द चौहान को गिरफ्तार कर लिया था। आनन्द की जमानत याचिका को दिल्ली उच्च न्यायालय भी रद्द कर चुका है। उसके खिलाफ चालान भी अदालत में पहुंच चुका और अदालत ने उसका संज्ञान लेने के बाद अगली प्रक्रिया भी शुरू कर दी है लेकिन दूसरा अटैचमैन्ट आदेश जारी होने के बाद किसी की भी गिरफ्तारी नही हुई है। इस मामले में नामजद अभियुक्तों की गिरफ्तारी पर किसी अदालत से कोई रोक नही है फिर भी अभी तक किसी की गिरफ्रतारी हुई नही है। अब तक किसी अन्य की गिरफ्तारी न हो पाने और आनन्द की जमानत उच्च न्यायालय द्वारा भी अस्वीकार कर दिये जाने से इस मामले को लेकर ईडी और केन्द्र सरकार की नीयत तथा नीति पर ही सवाल उठने शुरू हो गये हैं। क्योंकि ईडी सीधे जेटली के वित्तमन्त्रालय के अधीन आती है।
इन मामलों से हटकर अब सीबीआई ने प्रदेश के उद्योग विभाग के बद्दी स्थित संयुक्त निदेशक तिलकराज शर्मा को एक उद्योगपति अशोक राणा के साथ पांच लाख की रिश्वत लेते चण्डीगढ में रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। चार दिन के रिमाण्ड के बाद इन लोगों को चौदह दिन की ज्यूडिश्यिल कस्टडी में भेज दिया गया है। इस मामले में भी यह आया है कि रिश्वत का पैसा मुख्यमन्त्री के दिल्ली स्थित ओएसडी रघुवंशी को जाना था लेकिन इस मामले में भी अभी तक कोई और गिरफ्तारी नही हुई है। जबकि यह चर्चा आम हो चुकी है कि चार दिन के रिमाण्ड में तिलक राज ने मुख्यमन्त्री के ही कार्यालय के दो अधिकारियों का नाम लिया है जिनको रिश्वत का पैसा जाता था। यह भी चर्चा है कि उद्योगमंन्त्री और उनके अधिकारियों का नाम भी सामने आया है यह भी चर्चा है कि इसमें कुछ पत्रकारों के भी नाम सामने आये हैं। जिनके माध्यम से ऊपर तक लेन-देन होता था। चार महिलाओं के नाम भी चर्चा में हैं। तिलक राज प्रकरण के सामने आते ही भाजपा नेताओं ने भी इस पर काफी ब्यानबाजी शुरू की थी जो अब बन्द है। चर्चा है कि तिलक राज के साथ गिरफ्तार हुए अशोक राणा की सास सत्या राणा ऊना की एक प्रमुख भाजपा नेत्री  हैं और उनका मायका रोहडू में है। रोहडू के नाते उनके संबध मुख्यमन्त्री वीरभद्र सिंह से भी बहुत अच्छे हैं। इसी के साथ यह भी चर्चा है कि तिलक राज की भाजपा नेतृत्व के साथ भी बराबर की नजदीकीयां हैं। इस मामलें में भी और कोई गिरफ्तारी नही हुई है। साथ ही भाजपा भी इस प्रकरण पर अब चुप है।
ऐसे में आज वीरभद्र के मामलों की स्थिति ठीक वैसी ही है जैसी कि एचपीसीए और अनुराग-धूमल के मामलों की है। बल्कि केन्द्रिय स्वास्थ्य मन्त्री जगत प्रकाश नड्डा के खिलाफ भी ऐम्ज का मामला एक लम्बे अरसे से चर्चा में चल रहा है। संजीव चतुर्वेदी ने इस ऐम्ज प्रकरण में अदालत तक में नड्डा की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठाये हैं इन चर्चाओं में अब ऐम्ज की जमीन का हजारों करोड़ का मामला भी जुड़ गया है। इस जमीन मामले को संघ परिवार के ही एक सहयोगी प्रकाशन ने दस्तावेजों सहित पाठकों के सामने रखा है। फिर जब नड्डा प्रदेश वन मन्त्री थे तब जेपी उद्योग ने कैट प्लान में आभूषणों की खरीद दिखाकर जो कारनामा किया था विभाग में आज भी उसकी चर्चा सुनी जा सकती है। उस दौरान वन विभाग द्वारा विभिन्न एनजीओ को जो करोड़ो का अनुदान दिया गया था उसमें अधिकांश के तो नाम पते भी संदिग्ध रहे हैं। ऐसे मे भ्रष्टाचार आज एक ऐसा विषय बन गया है जिस पर कड़ा स्टैण्ड दिखाना और विरोधी से त्यागपत्र मांगना महज एक राजनीतिक संस्कृति मात्र रह गया है जिसके प्रति कभी कोई गंभीर नही होता। इस परिदृश्य में भाजपा को वीरभद्र के मामलों से अब राजनीतिक लाभ मिलने की बजाये नुकसान होने की ज्यादा संभावना हो गयी है।

तिलक राज प्रकरण में सीबीआई की नीयत और नीति फिर चर्चा में

                                      क्या यह मामला भी ईडी तक पहुंचेगा
शिमला/शैल। केन्द्र की जांच ऐजैन्सी सीबीआई ने 30 मई को उद्योग विभाग के बद्दी स्थित संयुक्त निदेशक तिलक राज शर्मा और एक उद्योगपति अशोक राणा को बद्दी के ही एक फार्मा उद्योग के सीए चन्द्रशेखर की शिकायत पर चण्डीगढ़ में 5 लाख की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। यह एक संयोग है कि 29 तारीख को वीरभद्र सिंह एवं अन्य को उनके खिलाफ सीबीआई द्वारा दिल्ली की अदालत में डाले गये आय से अधिक संपत्ति के मामले में जमानत मिली है। इसी दिन चण्डीगढ में सीबीआई तिलक राज के संद्धर्भ में आयी शिकायत की वैरीफिकेशन में तिलक राज, अशोक राणा और शिकायतकर्ता की रिश्वत के संद्धर्भ में हुई बातचीत की विडियो रिकार्डिंग करती है। जिसमें यह भी आता है कि रिश्वत में लिया जाने वाला पैसा दिल्ली में मुख्यमन्त्री वीरभद्र सिंह के ओएसडी रघुवंशी को दिया जाना है। रघुवंशी का नाम आने से ही इस पूरे प्रकरण का परिदृश्य ही बदल गया है।
सामान्यतः केन्द्र की सीबीआई को राज्य से जुड़े मामलों में तब तक सीधे जांच का अधिकार नही है जब तक की राज्य सरकार ऐसी जांच का स्वयं आग्रह न करे या फिर कोई अदालत ऐसी जांच के आदेश न दे। तिलक राज के मामले में यह दोनों ही स्थितियां नही है। सिर्फ इतना है कि तिलक राज का आवास चण्डीगढ़ में है। शिकायतकर्ता चन्द्रशेखर पंचकूला का रहने वाला है। रिश्वत की अदायगी चण्डीगढ़ में होती है, रिश्वत मांगे जाने और कब कैसे दी जानी है इस संद्धर्भ में हुई सारी बात चण्डीगढ़ के ही एक सैलून में होती है। वहीं इसकी रिकार्डिंग हो जाती है। बातचीत के अनुसार चण्डीगढ़ में ही अदायगी होती है और सारे लोग रंगे हाथो पकड़े जाते है सबकुछ चण्ड़ीगढ़ में ही घटता है। ऐसे में ऐसे ट्रैप की जानकारी हिमाचल पुलिस को पूर्व में दिये जाने का समय ही नहीं था और चण्डी़गढ़ केन्द्र शासित होने के कारण ऐसे मामलों में सीधे सीबीआई का क्षेत्राधिकार बन जाता है। ऐसे में यदि यह प्रकरण सिर्फ तिलक राज के रिश्वत लिये जाने तक ही सीमित रहता है तो इसे अंजाम तक पहुंचाने में सीबीआई को कोई दिक्कत नही आयेगी। यदि रिश्वत से आगे निकल कर यह मामला आय से अधिक संपत्ति तक का बन जाता है और इसमें अन्य लोगों की संलिप्तता भी सामने आती है तब इसी मामले की ईडी तक भी पहुंचने की संभावना बन जायेगी यह तय है।
इस मामलें में आयी शिकायत और उस पर सीबीआई द्वारा की गयी वैरीफिकेशन पर नजर डालने से यह सामने आता है कि शिकायतकर्ता ने फार्मा उद्योग के प्रतिनिधि के रूप में इस संयुक्त निदेशक के कार्यालय में 28 मार्च को 50 लाख की सब्सिडि लेने के लिये दस्तावेज सौंपे थे। इसके बाद वह कई बार इस कार्यालय में आता है और तिलक राज उसे अशोक राणा को मिलने के लिये कहता है जो उसे रिश्वत के बारे मे जानकारी देगा। फिर 22 मई को सब्सिडि के संद्धर्भ में विभाग द्वारा 19 मई को भेजा नोटिस उसे मिलता है। शिकायतकर्ता चन्द्र शेखर 19 मई को फोन पर तिलक राज से बात करता है और इसकी रिकार्डिंग कर लेता है लेकिन 22 मई को हुई बातचीत को वह रिकार्ड नही कर पाता है। 19 मई को रिकार्ड की गयी बातचीत में यह दर्ज नही है कि रिश्वत का पैसा रघुवंशीे को जाना है। 27 मई को रिश्वत मांगे जाने की शिकायत सीए चन्द्रशेखर सीबीआई से करते है, और प्रमाण के लिये 19 मई की रिकार्डिंग सौंपते हैं। इसके बाद सीबीआई स्वयं रिकार्ड़िंग की व्यवस्था करती है। यह रिकार्डिंग 28 और 29 मई को होती है इस रिकार्डिंग में एक बार यह जिक्र आता है कि यह पैसा रघुवंशी को जाना है। इस रिकार्डिंग के बाद 29 मई को सीबीआई ने विधिवत् मामला दर्ज कर लिया और 30 मई को रिश्वत कांड घट जाता है तथा रंगे हाथों गिरफ्तारी हो जाती है। इस प्रकरण में तिलक राज शर्मा और अशोक राणा के अतिरिक्त कोई और गिरफ्तारी नहीं हुई है। इन लोगों को चार दिन के रिमांड के बाद अब न्याययिक हिरासत में भेज दिया गया है।
अब यह सवाल उभरता है कि क्या सीबीआई ने इस रिश्वत कांड पर सिर्फ इसी आधार पर हाथ डाल दिया कि उसके पास शिकायत आई और उसने वैरीफाई करके इस पर अगली कारवाई कर दी। यदि सिर्फ इतना भर ही है तो यह प्रकरण अपने में पूर्ण हो गया है और इसका चालान अदालत में पहुंच जाना चाहिये। यदि इस प्रकरण की जांच में यह जुड़ता है कि इस तरह की रिश्वतखोरी कब से चल रही है और इसमें किस तरह के लोग शामिल रहे हैं, किस तरह के कितने कामों में यह रिश्वतखोरी हुई है, रिश्वत से हुई आय को किसने कहां और कैसे निवेशित किया है, ऐसे निवेश से कितनो के पास आय से अधिक संपत्ति मौजूद है, इस प्रकरण में रिमांड के दौरान इन लोगों ने क्या-क्या खुलासे किये है और उन पर कितना भरोसा किया जा सकता है तो इसके लिये यह जांच लम्बा समय लेगी। तब इसमें निश्चित रूप से कुछ और लोगों की गिरफ्तारी अवश्य होगी। यदि जांच में निश्चित रूप से यह स्थाापित हो जाता है कि वास्तव में ही यह पैसा रघुवंशी तक जाना था तो उस सूरत मे देर सवेर इसके छींटे मुख्यमंत्री के परिवार तक पहुंच जायेंगें किसी के भी खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला स्थापित होते ही ईडी भी इसका संज्ञान लेकर अपने स्तर पर कारवाई शुरू कर सकती है क्योंकि ऐसे मामलों में ईडी को सूचना देना अनिवार्य हो जाता है।
यह संभावना इसलिये उभर रही है क्योंकि इसमें मुख्यमन्त्री के दिल्ली स्थित ओएसडी रघुवंशी का नाम अशोक राणा, तिलक राज और चन्द्र शेखर की रिकार्डि़ंग में एक बार आ जाता है। फिर 23 मार्च 2016 के अटैचमैन्ट के बाद मुख्यमन्त्री परिवार के कुछ खाते सील हो चुके हैं ऐसे में फिर लाखों का खर्च किन साधनों से हो रहा है। इसके लिये इनसे परोक्ष/अपरोक्ष में जुडे़ लोगों पर नजर रखी जा रही थी, बल्कि ईडी ने बहुत अरसा पहले ही दो मन्त्रीयों को लेकर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर ली थी। सीबीआई सूत्रों के मुताबिक तिलक राज प्रकरण भी इसी रिपोर्ट का प्रमाण है। चण्डीगढ़ में एक मित्तल से भी ईडी ने कुछ जानकारीयां हासिल कर रखी है। मित्तल के एक समय मुख्यमन्त्री के साथ जुडे एक अधिकारी से गहरे रिश्ते रहे हैं। अब सीबीआई रघुवंशी और सुरेश पठानिया की काॅल डिटेलज का रिकार्ड खंगाल रही है। इस रिकार्ड की पड़ताल होने के बाद मामले के आगे बढ़ने की संभावना है। फिर ईडी से गिरफ्तारी की संभावना को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय में दायर याचिका 856/16 अभी तक लंबित चल रही है। इस संद्धर्भ में यदि इन सारी कड़ियों को एक साथ मिलाकर देखा जाये तो अभी संकट टला नही है और इसमें कई लोग लपेटे में आ सकते है क्योंकि ईडी ने दूसरे अटैचमैन्ट आदेश के साथ जो एनैक्सचर लगाये हैं वह बहुत गंभीर है उनके चर्चा में आते ही कई नये प्रकरण इसके साथ जुड़ जायेंगे यह तय है।

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