हिमाचल का 54,928 करोड़ रूपये का बजट ग्रामीण अर्थव्यवस्था, सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा और स्वास्थ्य पर फोकस
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Created on Wednesday, 25 March 2026 12:40
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Written by Shail Samachar
शिमला/शैल। हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तुत वर्ष 2026-27 का 54,928 करोड़ रुपये का बजट राज्य की आर्थिक दिशा, सामाजिक प्राथमिकताओं और विकास की रणनीति का व्यापक दस्तावेज है। यह बजट ऐसे समय में आया है जब राज्य को राजस्व घाटे, सीमित संसाधनों और बढ़ती विकास आवश्यकताओं के बीच संतुलन बनाना है। इसके बावजूद सरकार ने 8.3 प्रतिशत की अनुमानित आर्थिक वृद्धि दर, 2,83,626 रुपये की प्रतिव्यक्ति आय और 2.54 लाख करोड़ रुपये के सकल घरेलू उत्पाद का लक्ष्य निर्धारित कर यह संकेत दिया है कि विकास की गति बनाए रखने की ठोस कोशिश की जा रही है।
इस बजट का सबसे बड़ा फोकस ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आजीविका सुदृढ़ीकरण पर है। डेयरी क्षेत्र में सहकारी समितियों की संख्या को दोगुना कर 2,000 तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। दूध उत्पादकों को मिलने वाला प्रोत्साहन 3 रुपये से बढ़ाकर 6 रुपये प्रति लीटर किया गया है, जिससे सीधे हजारों किसानों को लाभ मिलेगा। पशुपालक समुदायों गद्दी, गुज्जर, किन्नौरा आदि के 40,000 से अधिक परिवारों के लिए 300 करोड़ रुपये की विशेष योजना शुरू की जाएगी। ऊन के लिए 100 रुपये प्रति किलोग्राम का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया गया है, जो पशुपालकों की आय बढ़ाने में सहायक होगा।
कृषि क्षेत्र में भी सरकार ने ठोस कदम उठाए हैं। गेहूं का समर्थन मूल्य 60 रुपये से बढ़ाकर 80 रुपये प्रति किलोग्राम किया गया है, जबकि मक्का 40 से 50 रुपये, जौ 60 से 80 रुपये और हल्दी 90 से बढ़ाकर 150 रुपये प्रति किलोग्राम की गई है। पहली बार अदरक को 30 रुपये प्रति किलोग्राम के एमएसपी में शामिल करना किसानों के लिए बड़ी राहत है। ‘बीज गांव’ योजना के तहत किसानों को प्रति बीघा 5,000 रुपये की सब्सिडी और प्रत्येक गांव को 2 लाख रुपये का अनुदान मिलेगा, जिससे पारंपरिक बीजों का संरक्षण और आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।
बागवानी और वन क्षेत्र में सरकार ने 8,000 हेक्टेयर में पौधरोपण और 4,000 हेक्टेयर में सामुदायिक वृक्षारोपण का लक्ष्य रखा है। 1,100 सामुदायिक समूहों को वित्तीय सहायता दी जाएगी। ‘मिशन 32 प्रतिशत’ के तहत वर्ष 2030 तक वन क्षेत्र को 32 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके अलावा, 50 नए ईको-टूरिज्म स्थलों का विकास और 50 वन विश्राम गृहों की ऑनलाइन बुकिंग की व्यवस्था पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती देगी।
सामाजिक कल्याण और महिला-बाल विकास के क्षेत्र में इस बजट में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं। दिव्यांगजनों की सामाजिक सुरक्षा पेंशन को 1,700 रुपये से बढ़ाकर 3,000 रुपये प्रति माह किया गया है। ‘शुभ विवाह योजना’ के तहत पात्र महिलाओं को 51,000 रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी। महिला सशक्तिकरण योजना के अंतर्गत 3 लाख रुपये तक का सब्सिडीयुक्त ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। इसके अलावा, बालिकाओं और महिलाओं के पुनर्वास के लिए नई योजनाओं की शुरुआत की जाएगी।
शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता सुधार और आधारभूत ढांचे को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। 150 स्कूलों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा, जबकि 150 अन्य स्कूलों को भी समान स्तर पर उन्नत किया जाएगा। राजीव गांधी डे-बोर्डिंग स्कूलों के लिए 99 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। बच्चों के पोषण के लिए 17 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। उच्च शिक्षा में 389 सहायक प्राध्यापकों की भर्ती और नए व्यावसायिक पाठयक्रम शुरू किए जाएंगे।
स्वास्थ्य क्षेत्र में बजट का आकार और दृष्टिकोण दोनों व्यापक हैं। नाहन मेडिकल कॉलेज के निर्माण के लिए 500 करोड़ रुपये, चंबा मेडिकल कॉलेज के विस्तार के लिए 194 करोड़ रुपये और हमीरपुर में नए डेंटल कॉलेज के लिए 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। टांडा, हमीरपुर और शिमला में आधुनिक कैंसर उपचार केंद्र स्थापित किए जाएंगे। 18 डे-केयर कैंसर सेंटर और 4 टर्शियरी केयर सेंटर स्थापित किए जाएंगे। इसके अलावा, 150 स्टाफ नर्स, 500 रोगी मित्र, 40 फार्मेसी अधिकारी और 30 रेडियोग्राफर सहित 1,000 से अधिक पद भरे जाएंगे।
ऊर्जा क्षेत्र में 450 करोड़ रुपये की लागत से बिजली व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाएगा। 5 से 11 मेगावाट क्षमता की छः सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित की जाएंगी। पांवटा साहिब में 124 करोड़ रुपये और कांगड़ा में 221 करोड़ रुपये की लागत से नए उपकेंद्र बनाए जाएंगे। पंचायत स्तर पर सोलर परियोजनाओं से होने वाली आय का 30 प्रतिशत पंचायत और 20 प्रतिशत कमजोर वर्गों के कल्याण पर खर्च किया जाएगा।
पर्यटन क्षेत्र में 345 करोड़ रुपये से अधिक की राशि विकास कार्यों पर खर्च की जाएगी। कांगड़ा एयरपोर्ट के विस्तार के लिए 3,349 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी दी गई है। इसके साथ ही, कई नए हेलीपोर्ट्स का निर्माण और हवाई सेवाओं का विस्तार किया जाएगा, जिससे राज्य की कनेक्टिविटी में सुधार होगा।
जल आपूर्ति और स्वच्छता के क्षेत्र में लगभग 2,000 करोड़ रुपये की व्यापक योजना तैयार की गई है। 500 जल योजनाओं में शोधन संयंत्र लगाए जाएंगे और 200 किलोमीटर पुरानी पाइपलाइन बदली जाएगी। शिमला में 10,000 घरों को 24ग7 जल आपूर्ति देने का लक्ष्य रखा गया है।
सड़क और परिवहन क्षेत्र में 500 किलोमीटर नई सड़कों का निर्माण, 950 किलोमीटर सड़कों की टारिंग, 1,500 किलोमीटर सड़कों का नवीनीकरण और 47 पुलों का निर्माण प्रस्तावित है। प्रधानमंत्राी ग्राम सड़क योजना के तहत 2,244 करोड़ रुपये की लागत से 1,538 किलोमीटर सड़कों को स्वीकृति दी गई है।
ग्रामीण विकास के तहत 1 लाख गरीब परिवारों को ‘मुख्यमंत्री अपना सुखी परिवार योजना’ के अंतर्गत 300 यूनिट मुफ्त बिजली और अन्य सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। महिलाओं को 1,500 रुपये प्रतिमाह की सहायता भी दी जाएगी।
आईटी और नवाचार क्षेत्रा में स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने, डिजिटल सेवाओं को मजबूत करने और ई-गवर्नेंस को लागू करने पर जोर दिया गया है। इससे प्रशासनिक पारदर्शिता और दक्षता में सुधार होगा।
कर्मचारी कल्याण के तहत एनएचएम कर्मचारियों को औसतन 14,000 रुपये की वेतन वृद्धि दी जाएगी। डॉक्टरों का वेतन 33,660 रुपये से बढ़ाकर 40,000 रुपये किया गया है। दैनिक वेतनभोगियों का वेतन 450 रुपये प्रतिदिन और आउटसोर्स कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन 13,750 रुपये प्रतिमाह निर्धारित किया गया है।
वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए मुख्यमंत्राी के वेतन में 50 प्रतिशत, मंत्रियों के वेतन में 30 प्रतिशत और विधायकों के वेतन में 20 प्रतिशत की अस्थायी कटौती की गई है। यह कदम दर्शाता है कि सरकार आर्थिक संतुलन बनाए रखने के लिए सख्त निर्णय लेने को तैयार है।
कुल मिलाकर यह बजट आंकड़ों के माध्यम से स्पष्ट करता है कि सरकार ने ग्रामीण विकास, सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, ऊर्जा, पर्यटन और अवसंरचना पर व्यापक निवेश की योजना बनाई है। हालांकि, इन योजनाओं की वास्तविक सफलता उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी। यदि सरकार इन घोषणाओं को धरातल पर उतारने में सफल रहती है, तो यह बजट हिमाचल प्रदेश के लिए दीर्घकालिक और समावेशी विकास की मजबूत नींव साबित हो सकता है।
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