बजट घोषणाओं पर भाजपा सांसदों ने सरकार को घेरा
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Created on Wednesday, 25 March 2026 12:38
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Written by Shail Samachar
शिमला/शैल। हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा पेश किए गये 54,928 करोड़ रूपये के बजट ने राजनीतिक सरगर्मियां तेज कर दी हैं। विपक्ष ने इस बजट को राज्य की बिगड़ती वित्तीय सेहत का प्रमाण बताते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाये हैं। बजट के घटे आकार से लेकर वेतन स्थगन, अधूरी गारंटियों और जमीनी स्तर पर न पहुंचने वाली योजनाओं तक भाजपा सांसदों ने सरकार को हर मोर्चे पर घेरने की कोशिश की है।
सबसे कड़ी प्रतिक्रिया राज्यसभा सांसद हर्ष महाजन की ओर से आई, जिन्होंने कहा कि पिछले वर्ष के 58,514 करोड़ रूपये की तुलना में इस बार का बजट 54,928 करोड़ रूपये रह जाना स्पष्ट संकेत है कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था सिकुड़ रही है। उन्होंने इसे कांग्रेस सरकार की ‘वित्तीय विफलता’ का सीधा सबूत बताया। महाजन ने यह आरोप भी लगाया कि सरकार अपनी असफलताओं पर पर्दा डालने के लिए कर्मचारियों का वेतन तक स्थगित करने को मजबूर हुई है, जबकि दूसरी ओर छोटे मानदेय बढ़ाकर जनता को भ्रमित किया जा रहा है। उनके शब्दों में, ‘यह बजट विकास का नहीं, बल्कि वित्तीय दिवालियापन का दस्तावेज है।’
उधर, राज्यसभा सांसद डॉ. सिकंदर कुमार ने सरकार की गारंटियों को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बजट भाषण में 100% गारंटी पूरी करने का दावा दोहराया गया, लेकिन पिछले तीन वर्षों में एक भी प्रमुख गारंटी जमीन पर नहीं उतरी। सिकंदर कुमार का कहना है कि कर्मचारियों के वेतन का 3% से लेकर 50% तक स्थगित करना इस बात का प्रमाण है कि राजकोषीय स्थिति बेहद विकट है। उन्होंने कहा, ‘जब सरकार खुद वेतन नहीं दे पा रही, तो वह विकास के वादे कैसे पूरा करेगी?’
लोकसभा सांसद सुरेश कश्यप ने बजट को ‘किसान, जवान और गरीब-सभी को धोखा देने वाला’ करार दिया। उन्होंने कहा कि सरकार दूध और फसलों के एमएसपी बढ़ाने की घोषणा जरूर कर रही है, लेकिन किसानों को न तो बाजार में उचित मूल्य मिल रहा है और न ही वास्तविक भुगतान मिल रहा है। कश्यप ने गरीब परिवारों को 300 यूनिट मुफ्रत बिजली देने की घोषणा को भी ‘चुनावी जुमला’ बताया। उनका तंज था, ‘घोषणाओं की खेती हो रही है, लेकिन किसानों के खेत सूखे पड़े हैं।’
वित्तीय अनुशासन और भविष्य की योजना पर भी विपक्ष ने सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने हिमाचल को कर्ज के दलदल में धकेल दिया है। उन्होंने कहा कि बजट में न तो कोई ठोस आर्थिक रोडमैप है और न ही उन कदमों का जिक्र, जिनसे राजस्व बढ़ाया जा सके। ठाकुर ने कटाक्ष करते हुए कहा, ‘यह बजट नहीं, कांग्रेस का ‘मैनेजमेंट ऑफ फेल्योर’ है।’ उन्होंने यह भी कहा कि वेतन स्थगन जैसे कदम बताता है कि सरकार पूरी तरह से वित्तीय संकट में फंस चुकी है, जबकि जनता को भ्रमित करने के लिए प्रचार आधारित योजनाएं लाई जा रही हैं।
इसी कड़ी में लोकसभा सांसद डॉ. राजीव भारद्वाज ने कहा कि सरकार खर्च की प्राथमिकताओं को तय करने में असफल रही है। भारद्वाज के अनुसार, वेतन रोकने और योजनाओं की नई घोषणाओं का कोई संतुलन दिखाई नहीं देता। उन्होंने कहा कि सरकार जनता से बलिदान की अपेक्षा तो कर रही है, लेकिन खुद जवाबदेही से बच रही है। ‘वेतन स्थगन और योजनाओं की भरमार-नीति कहीं नहीं, केवल दिखावा,’ उन्होंने तीखा टिप्पणी करते हुए कहा।
महिलाओं और युवाओं से जुड़े वादों पर भी विपक्ष ने सरकार को घेरा है। लोकसभा सांसद कंगना रनौत ने महिला सम्मान राशि के वादे को लेकर सरकार को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि 1500 रूपये प्रतिमाह देने की घोषणा तीन वर्षों से सिर्फ कागजों में है और अब फिर से उसी वादे को बजट में दोहराया जा रहा है। कंगना रनौत ने युवाओं के लिए रोजगार योजनाओं को ‘खोखला’ बताते हुए कहा कि सरकार नौकरी देने के बजाये उन्हें केवल प्रशिक्षण और भत्तों के नाम पर बहला रही है। उन्होंने कहा, ‘यह बजट उम्मीद का नहीं, निराशा और धोखे का प्रतीक है।’
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हिमाचल की आर्थिक चुनौतियां वास्तविक हैं-राजस्व में कमी, केंद्र से मिलने वाले अनुदानों में कटौती और बढ़ते वेतन-पेंशन भार ने सरकार के लिए कठिन परिस्थितियां खड़ी की हैं। लेकिन विपक्ष का आरोप है कि सरकार इन चुनौतियों से निपटने के लिए कोई ठोस समाधान प्रस्तुत करने में विफल रही है। बजट में कई नई घोषणाएं की गई हैं, पर विपक्ष का कहना है कि पिछले वादे ही पूरे नहीं हुए, तो नई घोषणाओं पर भरोसा कैसे किया जाए?
बजट पर इस तीखी राजनीतिक जंग के बीच अब आम जनता की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या सरकार जमीनी स्तर पर राहत दे पाएगी या विपक्ष के आरोप आने वाले महीनों में और अधिक तेज होंगे। फिलहाल, विपक्ष ने साफ संकेत दे दिया है कि वे बजट को लेकर सरकार को हर मोर्चे पर घेरने के लिए तैयार हैं, जबकि सरकार इस बजट को विकासोन्मुखी और संतुलित बताने में जुटी है।
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