भ्रष्टाचार और काले धन पर घिरती मोदी सरकार

Created on Thursday, 29 January 2026 13:08
Written by Shail Samachar
केन्द्र में 2014 में भ्रष्टाचार और काले धन के जिन मुद्दों पर सत्ता परिवर्तन हुआ था क्या उन मुद्दों से देश को मोदी के 11 वर्ष के शासन में निजात मिल गयी है या उनका आकार आज पहले से भी कहीं गुना बढ़ गया है? यह सवाल गौतम अडाणी का मुद्दा सामने आने के बाद हर भारतीयों के लिए एक चिन्ता और चिन्तन का विषय बन गया है। क्योंकि यह मुद्दा अमेरिकी अदालत में पहुंचने के बाद भारत सरकार और प्रधानमंत्री ने जिस तरह की प्रतिक्रियाएं इस पर दी हैं उससे यह और जटिल हो गया है। क्योंकि इन प्रतिक्रियाओं से जहां गौतम अडाणी और प्रधानमंत्री मोदी के संबंधों की प्रगाढ़ता सामने आयी है उससे यह आशंका बढ़ गयी है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इन शब्दों के साये में भारत को अपनी शर्तों पर व्यापार समझौता करने के लिए विवश कर सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो भारत की स्थिति आने वाले समय में वेनेजुऐला जैसी होने का खतरा है। इस पूरे परिदृश्य में यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि क्या भारत सरकार इस स्थिति पर देश की जनता के सामने सारे तथ्यों को रखने का साहस कर पायेगी। क्योंकि आज गौतम अडाणी का संकट पूरे देश का संकट बनता जा रहा है। क्योंकि अडाणी को लेकर जब भी देश में सवाल उठे हैं तो मोदी सरकार ने उनका जवाब देने की बजाये विषयान्तर करने का ही विकल्प चुना है। आज अडाणी अमेरिकी अदालत में जिस तरह से घिर गये हैं उसका नुकसान पूरे देश को होगा यह तय है। क्योंकि अडाणी पर उठे सवाल भ्रष्टाचार और काले धन के स्पष्ट प्रमाण हैं जिन पर मोदी सरकार के पास कोई जवाब नहीं है। लेकिन जिस अनुपात में अडाणी संकट सामने है उसी अनुपात में भारत सरकार इसके तथ्यों को देश के सामने रखने की बजाये उन्हें विषयान्तर करके दबाने का प्रयास कर रही है। इसलिए मोदी सरकार से सीधे सवाल करने का समय आ गया है। 2014 और फिर 2019 के लोकसभा चुनाव जिस बहुमत के साथ विषयान्तर करके मोदी भाजपा ने जीते उनका सच पिछले चुनाव में सामने आ गया है। इस चुनाव के बाद वोट चोरी का सच सामने आ गया है। बिहार में चुनाव परिणामों को लेकर मामला उच्च न्यायालय में पहुंच चुका है। कर्नाटक में इस पर मामला दर्ज है। अब कर्नाटक राज्य चुनाव आयोग ने वहां नगर निगमों के चुनाव ईवीएम मशीनों की जगह मत पत्रों से करवाने का फैसला लिया है। इस चुनाव में करीब 90 लाख मतदाता वोट डालेंगे। यह चुनाव एक ही दिन में होंगे और उनके परिणाम भी एक ही दिन में आ जाएंगे। भाजपा मत पत्रों के माध्यम से चुनाव करवाये जाने का विरोध कर रही है। यदि कर्नाटक में यह प्रयोग सफल रहता है तो शीर्ष अदालत और चुनाव आयोग के सामने मत पत्रों से चुनाव न करवाने का ठोस तर्क नहीं बचेगा। इस समय भाजपा सरकारों पर यह आरोप लगातार गहराता जा रहा है कि यह सरकारें न्यायपालिका पर पूरे नियंत्राण के प्रयासों में लगी हुई है। ई.डी. और सीबीआई के दुरुपयोग पर ममता सरकार केन्द्र के साथ सीधे टकराव पर आ गयी है। मामला उच्च न्यायालय और सर्वाेच्च न्यायालय तक पहुंच गया है। इसी बीच शंकराचार्य प्रकरण पर पूरे हिन्दू समाज में जिस तरह की प्रतिक्रियाएं उभरी हैं उससे भाजपा का हिन्दुत्व प्रश्नित हो गया है। कुल मिलाकर जिस तरह की परिस्थितियां निर्मित होती जा रही हैं उससे मोदी सरकार अपने ही एक समय पर उठाये गये सवालों में घिरती जा रही है।