विकास के दावों और जमीनी हकीकत के बीच अंतर उजागर
शिमला/शैल। हिमाचल प्रदेश विधानसभा में बजट 2026-27 पर चर्चा के दौरान सियासी टकराव तेज हो गया, जब पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार के बजट को ‘प्रदेश को गुमराह करने वाला झूठ का पुलिंदा’ करार दिया।
जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि सरकार ने अधिकांश योजनाओं की घोषणाएं बिना पर्याप्त बजट प्रावधान के की हैं और पिछले तीन वर्षों में घोषित कई योजनाएं जमीन पर उतर ही नहीं पायी। उन्होंने कहा कि बजट का आकार स्थिर रहना और प्रमुख क्षेत्रों में लगातार कटौती विकास की दिशा पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उनके अनुसार, 2024-25 की तुलना में पिछले वर्ष मेजर सेक्टर में 2354 करोड़ (21%) की कमी आई, जबकि आगामी वित्त वर्ष में यह कटौती 3188 करोड़ (41.77%)तक पहुंच गई है। सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा, ग्रामीण विकास, कृषि और सड़क जैसे क्षेत्रों में कटौती को उन्होंने ‘आत्मनिर्भर हिमाचल’ के दावों के विपरीत बताया।
उन्होंने कहा कि पूंजीगत व्यय तीन वर्षों में घटकर लगभग आधा रह गया है, जबकि राजस्व घाटा लगातार बढ़ रहा है। पिछले चार बजटों में औसतन 10,620 करोड़ रुपये का घाटा वित्तीय प्रबंधन पर सवाल खड़ा करता है। रोजगार के मुद्दे पर उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार के दौरान सरकारी नौकरियों में वृद्धि हुई थी, जबकि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में लगभग 15 हजार नौकरियां कम हो गई हैं। उनके मुताबिक, 2022 में जहां सरकारी कर्मचारियों की संख्या 1.90 लाख के करीब थी, वहीं 2025 में यह घटकर 1.75 लाख रह गई है।
केंद्र-राज्य संबंधों को लेकर उन्होंने कहा कि राज्य सरकार केंद्र पर आरोप लगाती है, जबकि वास्तविकता यह है कि राजस्व प्राप्तियों में केंद्र की हिस्सेदारी पिछले तीन वर्षों में 56%, 54% और 53.6% रही है। केंद्रीय करों, अनुदानों और योजनाओं के माध्यम से राज्य को निरंतर वित्तीय सहयोग मिलता रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि खेत बाड़ाबंदी योजना का बजट 40 करोड़ से घटाकर 10 करोड़ कर दिया गया है, जबकि बिजली सब्सिडी 1562 करोड़ से घटकर 858 करोड़ रह गई है। हिमकेयर जैसी योजनाओं में भी कटौती के संकेत बताये गये। उन्होंने वेतन प्रावधानों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि 2026-27 के बजट में वेतन के लिए 14,721 करोड़ रुपये का प्रावधान है, जो पिछले वर्ष से मात्र 5 करोड़ अधिक है, जिससे महंगाई भत्ता देने की मंशा पर संदेह होता है। साथ ही, वेतन स्थगन के संकेतों को उन्होंने संवैधानिक प्रावधानों के विरुद्ध बताया।
जयराम ठाकुर ने बजट भाषण और दस्तावेजों के आंकड़ों में अंतर का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि जहां बिजली रॉयल्टी 2,500 करोड़ बताई गई, वहीं बजट में प्राप्ति 2,191 करोड़ दिखाई गई है, जो दावों और वास्तविक आंकड़ों के बीच अंतर को दर्शाता है। इसी तरह आबकारी राजस्व अनुमान में भी गिरावट दर्ज की गई है।
उन्होंने अंत में सवाल उठाया कि जब बजट के आंकड़े ही सरकार के दावों का समर्थन नहीं कर रहे, तो विकास के दावे कितने विश्वसनीय हैं। वहीं, सरकार की ओर से बजट को संसाधन- आधारित और संतुलित बताते हुए इन आरोपों को खारिज किया जा रहा है।