शिमला/शैल। हिमाचल सरकार में सभी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष है। लेकिन 2001 में एक अधिसूचना के तहत इसमें बदलाव करते हुये यह कह दिया गया कि जो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी 10 मई 2001 को या इसके बाद नियुक्त हुये हैं या नियमित हुये हैं उनकी सेवानिवृत्ति 58 वर्ष पूरा होने पर हो जायेगी। इस अधिसूचना को एक नारो देवी ने प्रदेश उच्च न्यायालय में चुनौती दे दी। इस चुनौती पर न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल ने इस अधिसूचना को भेदभाव पूर्ण करार देते हुए सभी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को 60 वर्ष की आयु पूरी होने पर सेवानिवृत किये जाने का फैसला दिया है। 2024 में आये इस फैसले पर सुक्खू सरकार ने भी इसी आश्य के आदेश जारी कर दिये। लेकिन सरकार के यह आदेश अभी तक सारे विभागों और कार्यालयों तक नही पहुंचे हैं। ऊना में जल शक्ति विभाग में तो इन आदेशों के अनुसार चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति हो रही है। परन्तु इसी जिले के शिक्षा विभाग में आज तक इस आश्य के कोई आदेश नहीं पहुंचे हैं। शिक्षा विभाग में यह असमजस बनी हुई है कि वह अपने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को किस आयु सीमा में सेवानिवृत्त करें। जल शक्ति विभाग में 60 वर्ष की आयु पर एक बेलदार को सेवानिवृत्ति किये जाने का आदेश सामने आने के बाद सरकार की कार्य प्रणाली पर सवाल उठने शुरू हो गये हैं। यह चर्चा चल रही है कि एक ही सरकार के दो विभागों में अलग-अलग सेवानिवृत्ति नियम कैसे हो सकते हैं। 2024 में आये उच्च न्यायालय के फैसले की शिक्षा विभाग को जानकारी न होने से सरकार की कार्यप्रणाली सवालों में आ गयी है।
