हिमाचल में 26 वर्ष बाद लॉटरी की वापसी पर सियासी टकराव तेज
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Created on Tuesday, 01 September 2026 12:19
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Written by Shail Samachar
शिमला/शैल। हिमाचल प्रदेश में करीब 26 वर्ष बाद लॉटरी व्यवस्था दोबारा शुरू करने को लेकर भाजपा ने कांग्रेस सरकार पर हमला तेज कर दिया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू को पत्र लिखकर वित्त विभाग की ओर से जारी लॉटरी टेंडर तत्काल वापस लेने की मांग की है। वहीं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस सरकार चंद करोड़ रुपये के राजस्व के लिए प्रदेश के युवाओं और परिवारों के भविष्य को जुए की मानसिकता की ओर धकेल रही है।
अनुराग ठाकुर ने 26 अगस्त को मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में वित्त विभाग के ई-टेंडर का हवाला देते हुए कहा कि ऑनलाइन और ऑफलाइन लॉटरी व्यवस्था के लिए बिक्री एजेंट नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। उन्होंने सरकार से इस पूरी प्रक्रिया को तत्काल निरस्त करने की मांग की। उन्होने कहा कि लॉटरी हिमाचल की वित्तीय समस्या का समाधान नहीं हो सकती और सरकार को राजस्व बढ़ाने के लिए स्थायी वित्तीय सुधारों पर ध्यान देना चाहिए।
अनुराग ठाकुर ने कहा कि हिमाचल में लॉटरी पर प्रतिबंध किसी एक राजनीतिक दल की नीति नहीं रही, बल्कि इस मुद्दे पर लंबे समय तक दलगत सहमति बनी रही। उन्होंने कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल की सरकार ने 1999 में लॉटरी पर प्रतिबंध लगाया था। इसके बाद जब लॉटरी दोबारा शुरू हुई तो तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने 2007 में इसे फिर बंद किया। बाद की सरकारों ने भी इस व्यवस्था को दोबारा लागू नहीं किया।
भाजपा सांसद ने दावा किया कि लॉटरी के कारण हिमाचल में कर्मचारियों, पेंशनरों, मजदूरों और युवाओं की आय तथा बचत प्रभावित हुई थी और कई परिवार आर्थिक संकट में पहुंचे। आज भी इसका सबसे अधिक प्रभाव निम्न और मध्यम आय वर्ग के परिवारों पर पड़ने की आशंका है।
अनुराग ठाकुर ने राज्य की वित्तीय स्थिति का हवाला देते हुए कहा कि 2026 में हिमाचल का कर्ज 1,10,010 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है और ऋण-जीडीपी अनुपात 42 प्रतिशत से अधिक है। उनके अनुसार प्रस्तावित लॉटरी से सालाना करीब 100 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है, जो राज्य की वित्तीय चुनौतियों के मुकाबले बेहद सीमित राशि है।
उन्होंने सरकार को जीएसटी अनुपालन मजबूत करने और डिजिटल एकीकरण बढ़ाने का सुझाव देते हुए दावा किया कि इन उपायों से सालाना 250 से 350 करोड़ रुपये तक अतिरिक्त राजस्व जुटाया जा सकता है। उनका कहना है कि इससे लॉटरी के सामाजिक दुष्परिणामों के बिना राज्य की आय बढ़ाई जा सकती है।
इस बीच डॉ. राजीव बिंदल ने कांग्रेस सरकार पर और तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं को जुए की लत की ओर धकेलने की तैयारी कर रही है। बिंदल ने कहा कि हिमाचल जैसे शिक्षित और मेहनतकश प्रदेश में युवाओं के सामने रोजगार और अवसर उपलब्ध कराने की जरूरत है, न कि उन्हें आसान पैसे और जुए की मानसिकता की ओर ले जाने की। उन्होंने सरकार से लॉटरी का फैसला तत्काल वापस लेने की मांग की और चेतावनी दी कि भाजपा इसे जनता के बीच बड़ा मुद्दा बनाएगी।