CM की पत्नी के चुनावी प्रतिद्वंद्वी पर FIR से देहरा की सियासत से सत्ता के गलियारों तक बढ़ा राजनीतिक तापमान

Created on Wednesday, 22 July 2026 12:20
Written by Shail Samachar
शिमला/शैल। हिमाचल प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर देहरा विधानसभा क्षेत्र चर्चा के केंद्र में है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की पत्नी और देहरा से कांग्रेस विधायक कमलेश ठाकुर के खिलाफ 2024 के उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी रहे तथा दो बार निर्दलीय विधायक चुने गए होशियार सिंह चंब्याल के खिलाफ राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने भारतीय दंड संहिता की धारा 409 और 420 के तहत एफआईआर दर्ज की है। मामला विधायक ऐच्छिक निधि के कथित दुरुपयोग से जुड़ा है।
एफआईआर दर्ज होते ही यह मामला कानूनी दायरे से निकलकर राजनीतिक बहस का विषय बन गया है, क्योंकि होशियार सिंह वही नेता हैं जिन्होंने पहले निर्दलीय रहते हुए भाजपा का समर्थन किया, राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के खिलाफ मतदान किया और बाद में भाजपा के टिकट पर मुख्यमंत्री की पत्नी के खिलाफ चुनाव भी लड़ा।
विजिलेंस ब्यूरो के अनुसार शिकायत होशियार सिंह की एक कंपनी के कर्मचारियों की ओर से की गई थी, जो कथित लाभार्थियों में भी शामिल बताए गए हैं। प्रारंभिक जांच में बैंक रिकॉर्ड, सरकारी दस्तावेज और लाभार्थियों के बयान दर्ज किए गए। जांच में यह सामने आने का दावा किया गया कि वर्ष 2023 और 2024 के दौरान विधायक ऐच्छिक निधि से कुछ लोगों के नाम पर आर्थिक सहायता स्वीकृत हुई, जबकि संबंधित व्यक्तियों ने कथित रूप से कभी आवेदन ही नहीं किया था।
जांच एजेंसी का दावा है कि लाभार्थियों ने बयान में कहा कि उनके खातों में राशि आने के बाद उसे नकद निकालकर पूर्व विधायक के निर्देश पर उन्हें वापस सौंप दिया गया। इन्हीं तथ्यों के आधार पर सरकारी धन के कथित दुरुपयोग, आपराधिक न्यासभंग और धोखाधड़ी के प्रथम दृष्टया साक्ष्य मिलने की बात कहते हुए एफआईआर दर्ज की गई है। ब्यूरो ने यह भी स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान यदि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम या अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत किसी और अपराध के संकेत मिलते हैं तो उनकी भी जांच की जाएगी।
हालांकि अभी तक यह केवल एफआईआर का चरण है और आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया तथा जांच पूरी होने के बाद ही होगी। होशियार सिंह की ओर से इस मामले में विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
लेकिन इस कारवाई की राजनीतिक टाइमिंग ने विपक्ष को सरकार पर सवाल उठाने का अवसर भी दे दिया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि विजिलेंस और गृह विभाग दोनों मुख्यमंत्री के पास हैं, इसलिए निष्पक्षता पर सवाल उठेंगे। वहीं सरकार और विजिलेंस का कहना है कि शिकायत मिलने के बाद दस्तावेजी जांच के आधार पर कारवाई की गई है और कानून सभी के लिए समान है।
होशियार सिंह पिछले एक दशक से देहरा की राजनीति का बड़ा चेहरा रहे हैं। वर्ष 2017 और 2022 में उन्होंने निर्दलीय चुनाव जीतकर अपनी मजबूत पकड़ साबित की। राजनीतिक गलियारों में उन्हें भाजपा के तत्कालीन मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के करीबी नेताओं में माना जाता रहा। 2024 के राज्यसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा उम्मीदवार हर्ष महाजन के पक्ष में मतदान किया था। उसी चुनाव में कांग्रेस के छह विधायकों ने भी क्रॉस वोटिंग की थी, जिसके बाद सभी छह कांग्रेस विधायक और तीनों निर्दलीय विधायक अयोग्य घोषित कर दिए गए थे।
इसके बाद हुए उपचुनाव में भाजपा ने होशियार सिंह को आधिकारिक उम्मीदवार बनाया। उनके सामने मुख्यमंत्री सुक्खू की पत्नी कमलेश ठाकुर थीं। इस हाई-प्रोफाइल मुकाबले में कमलेश ठाकुर को 32,737 वोट मिले जबकि होशियार सिंह को 28,823 वोट प्राप्त हुए और वे लगभग 3,900 मतों के अंतर से चुनाव हार गए। चुनाव के दौरान होशियार सिंह और भाजपा ने कांग्रेस सरकार पर सरकारी मशीनरी और महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से चुनाव प्रभावित करने जैसे आरोप लगाए थे, जिन्हें कांग्रेस ने खारिज किया था।
अब लगभग दो वर्ष बाद उन्हीं होशियार सिंह के खिलाफ विजिलेंस की एफआईआर ने राजनीतिक माहौल को फिर गर्म कर दिया है। भाजपा इसे राजनीतिक प्रतिशोध का मुद्दा बना सकती है, जबकि कांग्रेस इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ कारवाई के रूप में पेश कर सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला केवल एक आपराधिक जांच तक सीमित नहीं रहेगा। इसके असर भाजपा के भीतर जयराम ठाकुर और प्रेम कुमार धूमल समर्थक माने जाने वाले नेताओं की रणनीति पर भी पड़ सकते हैं। होशियार सिंह लंबे समय तक जयराम खेमे के करीबी माने जाते रहे हैं, जबकि मुख्यमंत्री सुक्खू और पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के व्यक्तिगत संबंधों की चर्चा भी समय-समय पर होती रही है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा इस मुद्दे पर किस तरह की राजनीतिक रणनीति अपनाती है और पार्टी का शीर्ष नेतृत्व इस मामले को किस स्वर में उठाता है।
फिलहाल इतना तय है कि देहरा की चुनावी प्रतिद्वंद्विता अब अदालत, जांच एजेंसियों और राजनीतिक मंचों तक पहुंच चुकी है। आने वाले दिनों में जांच की दिशा, होशियार सिंह का पक्ष और भाजपा की प्रतिक्रिया इस पूरे घटनाक्रम की राजनीतिक तस्वीर को और स्पष्ट करेंगे।