नई दिल्ली।। महिला लॉ इंटर्न से सुप्रीम कोर्ट के छेड़छाड़ के मामले में एक नया केस जुड़ गया है। एक अन्य महिला वकील ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज स्वतंत्र कुमार पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है।
महिला वकील ने कहा कि जब वह जज के पास बतौर इंटर्न काम कर रही थी तब जज ने उसका यौन उत्पीड़न किया था। यह वाक्या 2011 का है।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज एके गांगुली पर भी ऐसा ही आरोप लगा था और सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एक समिति ने उन्हें प्रथम दृष्ट्या दोषी भी पाया था।
जस्टिस गांगुली पर भी एक महिला इंटर्न ने एक पांच सितारा होटल में यौन-उत्पीड़न का आरोप लगाया था।
हाल में जस्टिस गांगुली को इसी विवाद के चलते पश्चिम बंगाल के मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना पड़ा था।
नए मामले में भी महिला वकील ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पी सत्शिवम से पिछले माह की गई अपनी शिकायत में कहा है कि जज ने अपने निवास पर उस पर तीन बार यौन हमला किया। दो बार शारीरिक तौर पर और एक बार मौखिक रूप से।
महिला वकील ने कहा, मैं मई 2011 में बतौर इंटर्न जज से जुड़ी। एक मौके पर जज ने मेरी पीठ के निचले हिस्से पर हाथ रखा। इस वजह से मैं काफी असहज हो गई थी और मैंने जज का हाथ हटा दिया।
जज ने मुझसे एक बार पूछा कि क्या मैं उनके साथ यात्रा करने को तैयार हूं। होटल के कमरे में रुकने को तैयार हूं। महिला वकील का कहना है कि मैं कुछ कह नहीं पाई और काफी असमंजस में थी।
महिला वकील ने अपनी शिकायत में यह भी बताया कि 28 मई 2011 को जज ने अपने दाहिना हाथों से मुझे घेरा और मेरे बाएं कंधे पर किस किया।
29 मई 2011 को मैं जज को कह दिया कि मैं उनके साथ आगे इंटर्न के रूप में आगे काम नहीं कर सकती।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने महिला इंटर्न से साफ कर दिया है कि वह जज के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करेगा क्योंकि जज रिटायर हो चुके हैं।
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल इंदिरा जयसिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को जांच करनी चाहिए और कार्रवाई करनी चाहिए।
उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के पास उस जज का नाम है, वह चाहे तो नाम सार्वजनिक कर सकते हैं। गौरतलब है कि इंदिरा जयसिंह ने जस्टिस गांगुली के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की थी।
न्यूयॉर्क।। भारतीय राजनयिक देवयानी खोबरागड़े पर वीजा धोखाधड़ी और झूठे बयान देने के मामले में ग्रैंड ज्यूरी ने अभियोग लगा दिया।
पूर्ण राजनयिक छूट मिलने के बाद देवयानी सुबह भारत के लिए रवाना हुईं और शाम को दिल्ली पहुंच गईं। वहीं, अमेरिकी ज्यूरी का कहना है कि उनके खिलाफ आरोप बने रहेंगे।
हालांकि, भारतीय राजनयिक देवयानी खोबरागड़े के मामले में भारत ने जवाबी कार्रवाई करते हुए कहा है कि भारत में अमेरिकी दूतावास से एक अमेरिकी अधिकारी को वापस जाने के लिए कहा है।
एक सूत्र ने कहा कि हमें इस पर भरोसा करने का कारण है कि वह अधिकारी खोबरागड़े से जुड़ी पूरी प्रक्रिया और उसके बाद अमेरिका की एकतरफा कार्रवाई में शामिल था।
अमेरिकी अटॉर्नी प्रीत भरारा ने जिला न्यायाधीश शीरा शींडलिन को लिखे पत्र में कहा कि 39 वर्षीय खोबरागड़े के खिलाफ आरोप बने रहेंगे और यदि वह राजनयिक छूट के बिना अमेरिका आती हैं, तो उन्हें मुकदमे का सामना करना पड़ेगा।
भरारा ने कहा कि ग्रैंड ज्यूरी ने राजनयिक पर उनकी नौकरानी संगीता रिचर्ड के वीजा आवेदन से जुड़ी वीजा धोखाधड़ी और झूठे बयान देने के लिए दो मामलों में अभियोग लगाया है।
भारत वापसी के लिए विमान में सवार होते समय खोबरागड़े ने कहा, ‘मेरे खिलाफ लगाए गए आरोप झूठे और आधारहीन हैं। मैं इनके गलत साबित होने की उम्मीद करूंगी।’
देवयानी खोबरागड़े ने यह सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया कि इस प्रकरण से उनके परिवार पर कोई स्थायी असर न पड़े। यहां खास तौर पर इशारा उनके बच्चों की ओर था, जो अभी भी अमेरिका में ही हैं।
इस बीज, देवयानी के पिता उत्तम खोबरागड़े ने इस मामले में प्रति समर्थन के लिए देशवासियों को धन्यवाद दिया है।
देवयानी को ‘इंडिया-यूएस हैडक्वार्टर्स एग्रीमेंट’ के तहत 8 जनवरी को पूर्ण राजनयिक छूट प्रदान की गई थी।
नौ जनवरी को अमेरिका ने भारत से अनुरोध किया कि वह खोबरागड़े की राजनयिक छूट खत्म कर दे लेकिन भारत ने इस अनुरोध को मानने से इंकार कर दिया।
वर्ष 1999 बैच की विदेश सेवा अधिकारी देवयानी को अपनी नौकरानी के वीजा आवेदन में झूठी घोषणाएं करने के आरोप में 12 दिसंबर को गिरफ्तार किया गया था। उन्हें 2.5 लाख डॉलर के मुचलके पर रिहा किया गया था।
राजनयिक की कपड़े उतरवाकर तलाशी ली गई थी और उन्हें अपराधियों के साथ बंद रखा गया था।
उनके साथ इस तरह के व्यवहार के चलते दोनों देशों के बीच तल्खी पैदा हो गई थी । इसके जवाब में भारत ने अमेरिकी राजनयिकों के विशेषाधिकारों में कटौती कर दी थी।



अमेरिकी अटॉर्नी प्रीत भरारा ने जिला न्यायाधीश शीरा शींडलिन को लिखे पत्र में कहा कि 39 वर्षीय खोबरागड़े के खिलाफ आरोप बने रहेंगे और यदि वह राजनयिक छूट के बिना अमेरिका आती हैं तो उन्हें मुकदमे का सामना करना पड़ेगा।
भरारा ने कहा कि ग्रैंड ज्यूरी ने राजनयिक पर उनकी नौकरानी संगीता रिचर्ड के वीजा आवेदन से जुड़ी वीजा धोखाधड़ी और झूठे बयान देने के लिए दो मामलों में अभियोग लगाया है।
भरारा ने अपने पत्र में कहा, ‘अभियोग के लिए अभी किसी अभियोग पत्र की जरूरत नहीं है। हम जानते हैं कि प्रतिवादी (देवयानी) को बिल्कुल हाल में राजनयिक छूट मिली है। उन्होंने कहा कि इसलिए ये आरोप तब तक बने रहेंगे, जब तक वह अदालत में आकर इन आरोपों का सामना नहीं करतीं। फिर चाहे वह ऐसा राजनयिक छूट हटने के बाद करें या बिना छूट के अमेरिका लौटकर।
इस समय और अदालत के समक्ष उनके पेश होने के समय के बीच जो अंतर होगा, उसे स्वत: ही छोड़कर चला जाएगा। ऐसा अमेरिका के तीव्र सुनवाई कानून के तहत होगा, जो प्रतिवादी के उपलब्ध होने में हो रही देरी की अवधि को छोड़ने की अनुमति देता है।
भारत वापसी के लिए विमान में सवार होते समय खोबरागड़े ने कहा, ‘मेरे खिलाफ लगाए गए आरोप झूठे और आधारहीन हैं। मैं इनके गलत साबित होने की उम्मीद करूंगी।’
देवयानी खोबरागड़े ने यह सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया कि इस प्रकरण से उनके परिवार पर कोई स्थाई असर न पड़े। यहां खास तौर पर इशारा उनके बच्चों की ओर था, जो अभी भी अमेरिका में ही हैं। देवयानी को ‘इंडिया-यूएस हैडक्वार्टर्स एग्रीमेंट’ के तहत 8 जनवरी को पूर्ण राजनयिक छूट प्रदान की गई थी।
नौ जनवरी को अमेरिका ने भारत से अनुरोध किया कि वह खोबरागड़े की राजनयिक छूट खत्म कर दे लेकिन भारत ने इस अनुरोध को मानने से इंकार कर दिया।
वर्ष 1999 बैच की विदेश सेवा अधिकारी देवयानी को अपनी नौकरानी के वीजा आवेदन में झूठी घोषणाएं करने के आरोप में 12 दिसंबर को गिरफ्तार किया गया था। उन्हें 2.5 लाख डॉलर के मुचलके पर रिहा किया गया था।
राजनयिक की कपड़े उतरवाकर तलाशी ली गई थी और उन्हें अपराधियों के साथ बंद रखा गया था। उनके साथ इस तरह के व्यवहार के चलते दोनों देशों के बीच तल्खी पैदा हो गई थी । इसके जवाब में भारत ने अमेरिकी राजनयिकों के विशेषाधिकारों में कटौती कर दी थी।
देवयानी के वकील डेनियल अर्शाक ने कहा कि चूंकि उन्हें राजनयिक छूट मिल चुकी है, इसलिए वह देश के बाहर यात्रा कर सकती हैं और वह भारत लौट रही हैं। अर्शाक ने बताया, ‘चूंकि उनके राजनयिक दर्जे को मान्यता दे दी गई है, इसलिए संघीय अदालत ने आज यह माना है कि खोबरागड़े को यात्रा करने का अधिकार है। वह अपने देश लौटने को लेकर खुश हैं। उनका सिर आज ऊंचा है। वह जानती हैं कि उन्होंने कुछ गलत नहीं किया है और वह इस बात को सुनिश्चित करना चाहती हैं कि सच सामने आए।'
उन्होंने कहा कि खोबरागड़े संघीय वकील भरारा के कार्यालय द्वारा लाए गए ‘आधारहीन’ आरोपों को खारिज करती हैं और ‘ऐसे सबूत उपलब्ध कराना चाहती हैं, जो यह साबित करें कि इस मामले में जांचकर्ता और वकील बार-बार लापरवाह तथा गलत रहे हैं।’ अर्शाक ने कहा कि खोबरागड़े ने कोई झूठे बयान नहीं दिए और अपनी नौकरानी को उतना ही धन दिया, जितना उसे दिया जाना चाहिए था।
अर्शाक ने कहा, ‘हालांकि नौकरानी यहां अल्पावधि के अनुबंध के आधार पर आई थी, जिसके तहत उसे रोजगार खत्म होने पर भारत लौटना था। लेकिन झूठे दावों और लापरवाही पूर्ण जांच की वजह से उसे और उसके परिवार को अब अमेरिका में स्थायी आवास का सुख मिल रहा है।’
उन्होंने कहा, ‘इस मामले के जांचकर्ताओं ने तथ्यों का पूर्ण अध्ययन न करने की वजह से गंभीर गलतियां की हैं। हम उनकी इन बड़ी गलतियों का सबूत उपलब्ध कराने की कोशिश कर रहे हैं।’
इक्कीस पृष्ठों के अभियोग में कहा गया कि खोबरागड़े पीड़िता (नौकरानी रिचर्ड) को अमेरिकी कानून के तहत तय किया गया वेतन या शोषणात्मक कार्य स्थितियों से सुरक्षा नहीं देना चाहती थीं। अमेरिकी कानून के तहत आने वाले ये अनिवार्य नियम विदेशी राजनयिकों और सरकारी अधिकारियों के बीच अच्छी तरह प्रचारित हैं।
अभियोग में कहा गया कि खोबरागड़े ने रिचर्ड के वीजा आवेदन में मासिक आय के रूप में 4500 डॉलर की राशि भरी थी। इसमें कहा गया कि 4500 डॉलर की राशि ‘असल आय की राशि’ से मेल नहीं खाती।
अभियोग में कहा गया कि यह न तो वह मासिक आय थी, जो खोबरागड़े पीड़िता को देने (573 डॉलर प्रति माह) के लिए तैयार हुई थीं और न ही यह पीड़िता की वह मासिक आय थी, जो खोबरागड़े ने झूठे रोजगार अनुबंध के जरिए अमेरिकी दूतावास के सामने पेश की थी। 4500 डॉलर की यह राशि खोबरागड़े की मासिक आय से भी मेल नहीं खाती।
इसमें कहा गया कि खोबरागड़े ने रिचर्ड के साथ एक ‘झूठा रोजगार अनुबंध’ किया और उसे कहा कि यह वीजा हासिल करने के लिए एक ‘औपचारिकता मात्र’ है। खोबरागड़े ने रिचर्ड से कहा कि वह अमेरिकी अधिकारी द्वारा नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास में लिए जाने वाले वीजा साक्षात्कार में झूठ बोले।
The Joomla! content management system lets you create webpages of various types using extensions. There are 5 basic types of extensions: components, modules, templates, languages, and plugins. Your website includes the extensions you need to create a basic website in English, but thousands of additional extensions of all types are available. The Joomla! Extensions Directory is the largest directory of Joomla! extensions.
We search the whole countryside for the best fruit growers.
You can let each supplier have a page that he or she can edit. To see this in action you will need to create a users who is in the suppliers group.
Create one page in the growers category for that user and make that supplier the author of the page. That user will be able to edit his or her page.
This illustrates the use of the Edit Own permission.