शिमला/शैल। मुख्यमन्त्री वीरभद्र सिंह के खिलाफ दर्ज आय से अधिक सम्पति मामले में सी बी आई ने जांच पूरी करके इसका चालान ट्रायल कोर्ट में दायर करने के लिये दिल्ली उच्च न्यायालय से अनुमति मांगी है। दूसरी ओर इस मामले में दर्ज एफ आई आर को रद्द करने का आग्रह भी वीरभद्र सिंह ने अदालत में दायर किया हुआ है। 15 तारीख को यह दोनों मामले एक साथ दिल्ली उच्च न्यायालय में सुनवाई के लिये आये। लेकिन उस दिन बहस पूरी न होने के कारण अब यह मामला 23 तारीख को रखा गया है। उस दिन भी बहस पूरी न होने की सूरत में यह मामला अन्तिम निपटारे तक प्रति दिन सुना जायेगा। इस मामले पर सबकी निगाहें लगी हुई हैं और यह जिज्ञासा बनी हुई है कि इसमें एफ आई आर रद्द होगी है या सी बी आई को चालान ट्रायल कोर्ट में दायर करने की अनुमति मिल जायेगी।
इस प्रश्न को समझने के लिये इस मामले में जो कुछ अब तक घट चुका है उस पर नज़र दौड़ाने की आवश्यकता है। स्मरणीय है कि इसमें 23-09-2015 को सी बी आई ने एफ आई आर दर्ज की थी और उसके तीसरे दिन वीरभद्र के आवास और अन्य संबद्ध स्थानों पर छापामारी की थी। इस छापामारी को वीरभद्र ने तुरन्त प्रदेश उच्च न्यायालय में चुनौति दी। वीरभद्र ने अदालत से इस मामले में दर्ज एफ आई आर को रद्द करने के साथ ही यह भी आग्रह किया किTo issue directions, after perusing the record relating to the preliminary enquiry and regular case, thereby quashing the RC AC-1 2015 A-0004 under Section 13(2) r/w 13(1)(e) of Prevention of Corruption Act, W.P. (Crl.) No.2757/2015 1988 and Section 109 IPC registered by CBI on 23-09-2015 and all the action taken in pursuance of regular case including but not limiting to the search warrants, seizure memos and all investigation done by respondent No.1. वीरभद्र के इस आग्रह पर विचार करने के बाद जस्टिस राजीव शर्मा की खण्ड़पीठ ने इसमें सी बी आई को निर्देश दिये किThe CBI is directed to go ahead with the investigation but the statements of the petitioners shall not be recorded without the leave of the court. The central bureau of investigation shall not file challan without the express leave of this Court.
सी बी आई ने हिमाचल उच्च न्यायालय के इन निर्देशों को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौति दी और मामला दिल्ली उच्च न्यायालय में ट्रांसफर करने का आग्रह किया। इस पर 5-11-2015 को यह मामला दिल्ली उच्च न्यायालय में ट्रांसफर हो गया और CWP (Crl.) No. 2757/2015 के रूप में दर्ज हो गया। दिल्ली उच्च न्यायालय में 6 अप्रैल को सुनवाई के लिये आये इस मामले में अदालत के सामने यह आ चुका है कि Now the situation has changed as statements of some of the witnesses have been recorded under Section 164 Cr.P.C. and some stamp papers have also been recovered which create suspicion on the genuineness of MOU dated 15-06-2008.यह सामने आने के बाद ही दिल्ली उच्च न्यायालय ने वीरभद्र और प्रतिभा सिंह को जांच में शामिल होने के निर्देश दिये थे। इसके बाद ही वीरभद्र और प्रतिभा सिंह जांच में शामिल हुये थे। इस मामले में दर्ज एफ आई आर में वीरभद्र प्रतिभा के साथ ही आनन्द चौहान और चुन्नीलाल भी इसमें सह अभियुक्त हैं। सी बी आई मे मामला दर्ज होने के बाद ही इन लोगों के खिलाफ ई डी में मनीलांडरिंग का मामला दर्ज हुआ था। आनन्द चौहान को ई डी गिरफ्तार करके उनके खिलाफ चालान भी दायर कर चुकी है। अदालत ने चालान का संज्ञान लेकर आरोप तय करने के लिये तारीख भी तय कर दी है। सी बी आई चुन्नीलाल के अकांउटैंन्ट सरोज सिंह के 164 Cr. P.C. के तहत अदालत में ब्यान दर्ज करवा चुकी है। सूत्रों के मुताबिक चुन्नीलाल भी 164 Cr. P.C.मेे अपने ब्यान दर्ज करवा चुका है।
अब सी बी आई ने मामले की जांच पूरी करके इसका चालान ट्रायल कोर्ट में दायर करने की अनुमति दिल्ली उच्च न्यायालय से मांग रखी है जिस पर 23 तारीख को अगली सुनवाई होगी। इस समय जांच पूरी करके सी बी आई चालान तैयार कर चुकी है। अदालत के सामने 6 अप्रैल को ही यह आ गया था कि इसमें कुछ गवाह 164 Cr. P.C.के तहत ब्यान दर्ज करवा चुके हैं। आनन्द चौहान और वीरभद्र के बीच 15-06-2008 को हुये एग्रीमैंन्ट की प्रमाणिकता पर लगे प्रश्न चिन्ह भी अदालत के सामने आ चुके हैं। अब जब इस मामले में इतना कुछ घट चुका है और करीब एक साल से यह मामला अदालत के पास लंबित है। इसमें 6 अप्रैल के बाद लगी सारी तारीखों पर किसी-न-किसी कारण से सुनवाई हो नहीं पायी है संभवत इसी कारण 23 तारीख को निपटारे तक नियमित रूप से इसकी सुनवाई रखी गई है। कानून के जानकारों के मुताबिक इस स्टेज पर एफ आई आर का रद्द किया जाना किसी भी तरह संभव नहीं है। वीरभद्र ने इस मामले में सी बी आई के अधिकार क्षेत्रा पर ही यह सवाल उठाया है कि मामले से संबधित सारा कुछ हिमाचल में घटा है जबकि आनन्द चैहान ने दिसम्बर 2011 में आयकर विभाग को यह जवाब दिया था कि उसके खातों में जमा हुुआ सारा कैश वीरभद्र के सेब बगीचों की आय है और वह बगीचों का प्रबन्धक था। इसके बाद ही मार्च में वीरभद्र ने अपनी पुरानी आयकर रिटर्नज़ संशोधित की थीं और इस दौरान वीरभद्र केन्द्र में मन्त्री थे। इसके अतिरिक्त वीरभद्र उनके उपर लगे आरोंपों को भी अभी तक नकार नहीं पाये हैं बल्कि इस सब को आयकर से जुड़ा मामला करार देते आये हैं। बहरहाल यह मामला इस समय प्रदेश की राजनीति का एक प्रमुख मुद्दा बना हुआ है।
शिमला/शैल। वीरभद्र ने पिछले दिनों रोहडू के एक आयोजन में जिस कदर ठेकेदारों पर अपने गुस्से को सर्वाजनिक किया था उसके बाद यह उम्मीद जगी थी कि जल्द ही इस ठेकेदारी संस्कृति में कुछ सुधार होगा। मुख्यमन्त्री ने ठेकेदारों को लुटेरा की संज्ञा दी थी। माना जा रहा था कि जब वीरभद्र को ठेकेदारों के बारे में इस कदर जानकारी है तो निश्चित रूप से वह कुछ लोगों के खिलाफ तो कड़ी कारवाई करेंगे ही। क्योंकि मुख्यमन्त्री के अपने पास ही लोक निर्माण विभाग है। लेकिन आज तक किसी ठेकेदार के खिलाफ कोई कारवाई सामने नही आयी है। जबकि कुल्लु के बंजार में जब डीसी के खिलाफ अपना गुस्सा सार्वजनिक मंच से निकालते हुए मंच से ही डी सी को बदलने के आदेश जारी कर दिये तो उन पर अमल भी हो गया और डी सी साहिब बदल भी दिये गये।
ठेकेदार किस तरह काम कर रहें है। कैसे उनके लिये हजार काम एक लाख में और एक लाख का काम एक करोड़ में सपन्न होता है। इसका उदाहरण तो शिमला के हो रहे सौंदर्यकरण में साफ देखा जा सकता है। जहां पर दो चर्चो की रिपेयर के लिये ही 17.50 करोड का प्रावधान किया गया है चर्च कमेटी और पर्यटन विभाग में इसका बाकायदा अनुबन्ध भी हो चुका है। मालरोड़ और आस -पास साढ़े तीन करोड़ में सात रेनशैलटर बन रहे है। आम आदमी इन कीमतों को देखकर एकदम स्तब्ध है। मजे की बात है कि लोक निमार्ण की तरह पर्यटन विभाग भी स्वयं मुख्यमन्त्री के पास है इसलिये यह जो कुछ हो रहा है यह सीधे मुख्यमन्त्री की जानकारी में होगा ही। लेकिन इसके बावजूद मुख्यमन्त्राी इन ठेकेदारों पर कोई नियन्त्रण नहीं कर पा रहे है। मुख्यमन्त्री ऐसा ही गुस्सा सोलन में भी ठेकेदारों ओर लोक निमार्ण विभाग के अधिकारियों के खिलाफ उगल चुके है।
जब मुख्यमन्त्री का गुस्सा सार्वजनिक तौर पर सामने आने के बाद भी किसी के खिलाफ कोई कारवाई न हो पाये तो निश्चित रूप से यह चर्चा उठेगी ही कि सरकार और प्रशासन पर ठेकेदार कैसे भारी पड़ रहें है । यह सवाल सचिवालय के गलियारों से लेकर स्कैण्डल तक चर्चा में है। इस में सबसे ज्यादा चर्चा स्वयं ठेकेदार कर रहें है। चर्चा है कि ठेकेदारों से इस समय कुछ लोग मुख्यमन्त्री के नाम पर ही उगाही करने लग गये है इसके लिये मुख्यमन्त्री के कठिन समय की दुहाई दी जा रही है। कहते है कि इसकी जानकारी रोहडू से ही मुख्यमन्त्री को मिली है और उसके बाद वह बहुत ज्यादा गुस्से में है और हर कहीं उनका क्रोध फूट पड़ रहा है। क्योंकि ऐसा करने वालों को तो वह रोक नही पा रहे है। कहते है कि रोहडू में इसको लेकर कुछ समर्थकों में अच्छी खासी बहसबाजी भी हो गयी है।
शिमला/शैल। वीरभद्र के खिलाफ चल रही मनीलाॅडरिंग प्रकरण की जांच में ईडी ने 23 मार्च को करीब आठ करोड़ की चल-अचल संपति का अटैचमैन्ट आर्डर जारी किया था। यह आर्डर प्रोविजनल था और मनीलाॅडंिरग अधिनियम के मुताबिक यह 180 दिन के बाद रिव्यू होना तय है। 180 दिन 23 सितम्बर को पुरे हो जाते हैं। इस आर्डर को वीरभद्र के बच्चों अपराजिता और विक्रमादित्या ने चुनौती दी थी लेकिन अदालत ने उन्हे क्राईम प्रोसीडज का लाभार्थी मानकर आदेश को निरस्त नही किया था। 23 मार्च के आदेश में यह कहा गया है कि इस प्रकरण में वक्कामुल्ला चन्द्र शेखर प्रंसग में अभी जांच चल रही है।
इसी प्रकरण में ईडी ने वीरभद्र के एलआईसी ऐजैन्ट आनन्द चौहान को गिरफ्तार किया था। अदालत से उन्हें जमानत नही मिल पायी है। बल्कि जमानत के आग्रह मामला बनता है। इसके बाद ईडी ने गिरफ्तारी के 59 दिन बाद आनन्द चैहान के खिलाफ अदालत में चालान दायर कर दिया। यदि 60 दिन के भीतर यह चालान दायर न किया जाता तो 60 दिन के बाद चैहान की जमानत के लिये एक पुख्ता आधार खड़ा हो जाता। इस चालान में भी यह कहा गया है कि अभी जांच पूरी नही हुई है और इसमें शीघ्र ही अनुपूरक चालान दायर किया जायेगा।
अब 180 दिन के बाद 23 मार्च का अटैचमैन्ट आर्डर रिव्यू होना है उस दिन तय होगा कि इस आर्डर को स्थायी करने और इसमें जब्ती की अगली कारवाई को करने के पुख्ता आधार है या नही। कानून के जानकारोें के मुताबिक इन आधारों के लिये ईडी को अपनी जांच पूरी करके यह आधार अदालत के सामने रखने होंगे अन्यथा इस अटैचमैन्ट आर्डर को आगे जारी रखना बहुत संभव नहीं होगा। जांच पूरी ने होने नर अपराजिता और विक्रमादित्य की याचिका को भी आधार मिल जायेगा।
अभी इस प्रकरण में प्रतिभा सिंह और चन्द्र शेखर से ही अगली पूछताछ हो पायी है। अन्यो से पूछताछ होना बाकी है। ईडी सूत्रों के मुताबिक प्रतिभा सिंह से जिस तरह के प्रश्न जांच में पूछे गये है उससे जांच का दायरा बढ़ने की संभावना है। उनके पंजाब विश्वविद्यालय में अध्ययन से लेकर रामपुर क्षेत्रा के किसी दलिप चौधरी तथा रंजना मामले और परिवार की निकटस्थ रिश्तेदारी में कभी हुई आत्महत्या तक की जानकारी जुटाने और एक एन आर आई के माध्यम से हुए निवेश को लेकर पूछताछ होने तथा कामरू मर्ति चोरी प्रकरण को लेकर भी सवाल पूछा गया। सूत्रों के दावे को सही माना जाये तो स्थिति के और गंभीर होने की संभावना है ऐसे में 23 सितम्बर के रिव्यू में क्या घटता है उस पर सबकी निगाहें लगी है।
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