Sunday, 21 June 2026
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अन्ततः कालरा काॅम्लैक्स का कटा बिजली,पानी और लगा 50 हजार का जुर्माना

शिमला/शैल। शिमला के माल रोड पर बन रहे कालरा कम्पलैक्स का अन्ततः नगर निगम शिमला के आयुक्त की अदालत ने बिजली पानी काटने के आदेश सुनाने के साथ ही इस पर पचास हजार का जुर्माना भी लगा दिया है। यही नही इसके निर्माण पर भी रोक लगा दी है और अपने आदेशों की अनुपालना सुनिश्चित करने के लिये यहां पर इसी व्यवसायी के खर्च पर निगम का कर्मचारी भी तैनात कर दिया है। अभी यह कम्पलैक्स निर्माणाधीन स्टेज के दायरे में आता है और निगम के नियमों के मुताबिक ऐसे निर्माण में कोई व्यवसायी गतिविधियां शुरू नही की जा सकती हैं। लेकिन निगम के नियमों को नजरअन्दाज करते हुए यहां पर सरेआम व्यवसायी गतिविधियां भी चल रही हैं। निगम कोर्ट के फैसले पर अमल करते हुए बिजली बोर्ड ने यहां की बिजली जो काट दी है लेकिन बिजली काटने के बाद यहां पर जैनरेटर से काम चलाया जा रहा है लेकिन यहां पर एक रोचक सवाल यह खड़ा हो गया है कि बिजली काटने के आदेश कोई बिल की अदायगी न हो पाने के कारण नही हुए हैं बल्कि यह निर्माण स्वीकृत नक्शे के अनुरूप न होने पर सज़ा के तौर पर हुए हैं। अब इस काॅम्पलैक्स में जैनरेटर से बिजली दी जा रही है ऐसे में इस पर सबकी निगाहें लगी हुई है कि इस पर क्या प्रावधान समाने आता है।
कालरा काॅम्पलैक्स माल रोड़ पर स्थित है और यह हैरिटेज जोन में आता है। इस क्षेत्र में प्रदेश सरकार ने वर्ष 2000 से ही नये निर्माणों पर प्रतिबन्ध लगा रखा है। सरकार के इसी प्रतिबन्ध पर एनजीटी ने दिसम्बर 2017 में दिये फैसले में मोहर लगा दी है। एनजीटी के फैसले का अनुमोदन सर्वोच्च न्यायालय भी कर चुका है। प्रदेश उच्च न्यायालय ने भी पिछले दिनों अवैध निर्माणों का कड़ा संज्ञान लेते हुए इनके बिजली, पानी काटने के आदेश किये हुए हैं और इन आदेशों की अनुपालना भी हुई है। इस तरह यह कालरा काॅम्पलैक्स हैरिटेज जोन में आता है और यहां पर केवल ओल्ड लाईनज़ पर ही निर्माण करने की अनुमति है। यहां पर भी गौरतलब है कि यहां के पुराने भवन में 1991 में आग लगी थी। उसके बाद जब यहां पर पुनः निर्माण की बात आयी थी तब यह मामला प्रदेश उच्च न्यायालय तक पहुंच गया था और अदालत ने नये निर्माण के लिये कुछ शर्ते लगा दी थी। तब इन शर्तों पर अमल न हो पाने के कारण यहां कोई निर्माण नही हो पाया था।
उसके बाद यह काॅम्पलैक्स कालरा के पास आ गया और 25.5.2008 को इसके निर्माण का नक्शा पास करवाया गया। अब जब सरकार ने वर्ष 2000 में ही हैरिटेज जोन में नये निर्माणों पर पूरी तरह प्रतिबन्ध लगा दिया था तब स्वभाविक है कि इसका नक्शा भी ओल्ड लाईनज पर ही स्वीकृति हुआ होगा। लेकिन अब जब यह निर्माण सामने आया तब इस पर स्वीकृत नक्शें से हटकर निर्माण करने के आरोप लगने शुरू हो गये। इन आरोपों का संज्ञान लेते हुए निगम ने कालरा को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए तुरन्त प्रभाव से काम बन्द करने के आदेश दिये। लेकिन इन आदेशों पर कोई अमल नही हुआ। निगम ने पहला नोटिस 11-7-2018 और अन्तिम नोटिस 2-11-18 को दिया तथा इस तरह चार नोटिस दिये। इस निर्माण में स्वीकृत नक्शे से हटकर कितना निर्माण हुआ है इस पर संबंधित जेई से लेकर निगम के वास्तुकार तक से रिपोर्टे ली गयी। जब लगातार नोटिस दिये जाने के बाद भी काम बन्द नही किया गया तब यह मामला आयुक्त की कोर्ट में आया और अन्ततः यह फैसला सुनाया गया। इस फैसले की अपील की जा रही है। अब सबकी नज़रें इस अपील पर आने वाले फैसले पर लगी हैं।
स्मरणीय है कि इस समय नगर निगम के पास इस तरह के निर्माणों के 960 मामले लंबित हैं इनमें कई मामले तो ऐसे भी है जहां पर रिटैन्शन पाॅलिसी आने के बाद निर्माण बढ़ाये गये हैं लेकिन संयोगवश ऐसे निर्माणों की कम्पलीशन रिपोर्ट न तो गिनम में दायर हो पायी और न ही स्वीकृत हो पाये। अब एनजीटी का फैसला उन्ही निर्माणों पर लागू नही होगा। जिनकी कम्लीशन फैसला आने तक स्वीकार हो चुकी है अन्य पर नही। ऐसे में कालरा कम्पलैक्स के मामले में सबकी निगाहें इस पर लगी है कि निर्माणों में अवैधतता को रोकने के लिये अदालत, प्रशासन और सरकार क्या रूख अपनाते हैं क्योंकि कालरा को सरकार का नजदीकी माना जाता है।

रचना गुप्ता के देवाशीष को नोटिस से उच्च न्यायालय में लंबित याचिका पर शीघ्र सुनवाई की संभावना बढ़ी

शिमला/शैल। प्रदेश लोकसेवा आयोग की सदस्य डा. रचना गुप्ता ने दिल्ली के एक आरटीआई के सक्रिय कार्यकर्ता देवाशीष भट्टाचार्य को उसकी सोशल मीडिया में आयी कुछ पोस्टों पर एतराज जताते हुए दिया गया है कि देवाशीष ने यह नोटिस मिलने की पुष्टि करते हुए कहा है कि उसने इन पोस्टों में डा. रचना गुप्ता के खिलाफ व्यक्तिगत स्तर पर कुछ भी आपत्तिजनक नही कहा है। स्मरणीय है कि जब जयराम सरकार बनने के बाद डा. रचना गुप्ता को लोकसेवा आयोग का सदस्य लगाया गया था तब उनकी नियुक्ति की वैधता पर इसलिये सवाल उठे थे क्योंकि कांग्रेस के शासनकाल में इसी आयोग में सदस्य लगी मीरा वालिया की नियुक्ति पर भाजपा ने सवाल उठाये थे। बल्कि भाजपा ने प्रदेश विधानसभा के चुनावों में भी इस नियुक्ति को बड़ा मुद्दा बनाया था। इसलिये जब डा. रचना गुप्ता की नियुक्ति हुई और इसके लिये आयोग में सदस्यों के दो पद सृजित किये गये तब इस पर सवाल उठे थे।
जब मीरा वालिया की नियुक्ति हुई थी तब इस नियुक्ति को एक हेमराज ने प्रदेश उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। हेमराज की यह याचिका अभी तक प्रदेश उच्च न्यायालय में लंबित चल रही है। अब माना जा रहा है कि डा. रचना गुप्ता के देवाशीष को नोटिस से इस याचिका पर शीघ्र सुनवाई की सम्भावना आ सकती है यह याचिका सर्वोच्च न्यायालय में पंजाब लोकसेवा को लेकर पंजाब, हरियाणा उच्च न्यायालय के फैसले की अपील में आयी थी। पंजाब लोकसेवा आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति को एक जनहित याचिका में चुनौती दी गयी थी और उच्च न्यायालय ने इस नियुक्ति को रद्द कर दिया था। पंजाब सरकार अपील में सर्वोच्च न्यायालय में चली गयी और शीर्ष अदालत ने न केवल पंजाब- हरियाणा, उच्च न्यायालय के फैसले को बहाल रखा बल्कि यह निर्देश भी जारी किये कि लोक सेवा आयोगों में अध्यक्ष/सदस्यों की नियुक्ति को लेकर स्पष्ट मानक और पूरी तरह परिभाषित प्रक्रिया होनी चाहिये क्योंकि इनकी नियुक्ति तो राज्यपाल के द्वारा की जाती है लेकिन निकालने का अधिकार राज्यपाल को नही है। इसके लिये प्रक्रिया परिभाषित है जो कि शीर्ष अदालत से लेकर राष्ट्रपति तक जाती है। सर्वोच्च न्यायालय का यह फैसला 15 फरवरी 2013 को आया था और पूरे देश पर लागू है। संयोगवश हिमाचल लोकसेवा आयोग की वर्तमान की सारी नियुक्तियां इस फैसले के बाद ही हुई है।
हेमराज की याचिका में इन सभी नियुक्तियों को चुनौती दी गयी है। क्योंकि प्रदेश लोकसेवा की नियुक्ति को लेकर आज तक कोई मानक और प्रक्रिया परिभाषित नही है। ऐसे में माना जा रहा है कि इस नोटिसबाजी के बाद उच्च न्यायालय में लंबित इस याचिका पर शीघ्र सुनवाई की संभावना आ जायेगी क्योंकि देवाशीष ने अपनी पोस्टों में अधिकांश में मानकों और प्रक्रिया पर ही सवाल उठाये हैं। ऐसे में स्वभाविक है कि वह इस याचिका पर उच्च न्यायालय में शीघ्र सुनवाई के लिये प्रयास करेगा। माना जा रहा है कि इस नोटिस का जो भी परिणाम रहेगा उसका 2019 के चुनावों पर असर पडेगा।

भाजपा और सरकार के लिये घातक होगी राहूल-प्रियंका पर अभद्र टिप्पणी

शिमला/शैल। कांग्रेस से ‘‘आप’’ और आप से भाजपा में पहुंचे डाक्टर रणवीर सिंह नेगी ने सोशल मीडिया में राहूल गांधी और प्रिंयका गांधी पर अभद्र टिप्पणी करके भाजपा के लिये प्रदेश में भयानक कठिनाई खड़ी कर दी है। आज तक सोशल मीडिया के मंच पर जिस तरह से राहूल और पूरे नेहरू गांधी परिवार के खिलाफ अभद्रता परोसी जाती रही है उसी के कारण इन विधानसभा चुनावों में 2014 के लोकसभा चुनावों के मुकाबले में भाजपा को 16% समर्थन का नुकसान उठाना पड़ा है। आज तक हिमाचल इस तरह की घटित हरकतों से बचा हुआ था। लेकिन आज नेगी जैसे अति उत्साहियों ने बैठे -बिठाये कांग्रेस को एक मुद्दा दे दिया है। नेगी की टिप्पणी पर उभरे रोष के परिणामस्वरूप युवा कांग्रेस, कांग्रेस की शिकायत पर प्रदेश के कई हिस्सों में पुलिस में मामला दर्ज करवा दिया गया है।
नेगी की टिप्पणी से मुस्लिम समुदाय में भी रोष के स्वर उभरे हैं। अब यह नेगी प्रकरण भाजपा और जयराम सरकार के लिये एक परीक्षा साबित होने जा रही है। इसमें यदि भाजपा नेगी को तुरन्त प्रभाव से बाहर का रास्ता नही दिखाती है तो यह माना जायेगा कि इस टिप्पणी को कहीं न कहीं पार्टी का समर्थन हासिल है। यही स्थिति सरकार के लिये होगी। यदि पुलिस इस मामले में तुरन्त प्रभाव से कारवाई नहीं करती है तो उससे भी यही सन्देश जायेगा कि इसमें सरकार की भी अपरोक्ष में सहमति है। अब इस पर सबकी निगाहें लगी हैं कि सरकार और पार्टी इसमें क्या कदम उठाते हैं। यह तय है कि यदि इसमें कोई ढील बरती गयी तो इसका चुनावों मे नुकसान उठाना पड़ेगा।

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